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साल 2008 के मालेगांव विस्फोट मामले में  मुख्य अभियुक्त पूर्व लेफ्टिनेंट कर्नल प्रसाद श्रीकांत पुरोहित को सोमवार को सर्वोच्च न्यायालय से जमानत मिल गई. हुए इस विस्फोट में सात लोगों की मौत हो गई थी. 101 लोग घायल हुए थे.

सुप्रीम कोर्ट ने अंतरिम जमानत देते हुए कहा, “हम बोम्बे हाई कोर्ट के फैसले को पलट रहे हैं.” न्यायमूर्ति आरके अग्रवाल और न्यायमूर्ति अभय मनोहर सप्रे ने पुरोहित को सशर्त जमानत देते हुए कहा कि वह सबूतों से छेड़छाड़ नहीं करेगा.

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इस मामले में एक और अभियुक्त साध्वी प्रज्ञा ठाकुर कोबीती अप्रैल में ही बॉम्बे हाईकोर्ट की ओर से ज़मानत मिल चुकी है. कर्नल श्रीकांत पुरोहित का संबंध दक्षिण पंथी संगठन अभिनव भारत से है. मालेगांव ब्लास्ट को कथित तौर पर अभिनव भारत ने ही अंजाम दिया था.

एनआईए के मुताबिक, पुरोहित इस सबंध में गुप्त बैठकों में हिस्सा लेकर धमाकों के लिए विस्फ़ोटक तक जुटाने की सहमति दे चूका है. ये ब्लास्ट उसने हिंदुओं पर मुस्लिमों के अत्याचार का बदला लेने को लेकर किया था.

बॉम्बे हाइकोर्ट ने एनआईए की रिपोर्ट के अनुसार, उसने हिंदू राष्ट्र के लिए अलग संविधान बनाने के साथ, एक अलग भगवा झंडा भी बनाया.

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