सुप्रीम कोर्ट ने आज अपने फैसले में आधार की संवैधानिक वैधता बरकरार रखा है। पांच जजों की पीठ ने आधार के पक्ष में 4-1 से फैसला सुनाया। लेकिन आधार से जुड़े कई बड़े बदलाव भी किए गए है।

जस्टिस एके सीकरी ने चीफ जस्टिस दीपक मिश्रा, जस्टिस एम खानविलकर की ओर से सुनाये गए फैसले में कहा गया कि आधार कार्ड आम आदमी की पहचान है, इस पर हमला संविधान के खिलाफ है। सीकरी ने कहा कि ये जरूरी नहीं है कि हर चीज बेस्ट हो, कुछ अलग भी होना चाहिए।

जस्टिस सीकरी ने कहा कि शिक्षा हमें अंगूठे से हस्ताक्षर की तरफ ले गई, लेकिन एक बार फिर तकनीक हमें अंगूठे की ओर ले जा रही है। जस्टिस एके सीकरी के बाद जस्टिस चंद्रचूड़ ने अपने फैसले में आधार का विरोध किया।

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उन्होने कहा कि आधार एक्ट को किसी मनी बिल के तौर पर नहीं पास किया जा सकता है। उन्होंने कहा कि सरकार अवैध प्रवासियों को आधार कार्ड ना दें। जस्टिस चंद्रचूड़ ने कहा कि आधार कार्ड निजता के अधिकार का उल्लंघन करता है, इससे आदमी और वोटर्स की प्रोफाइलिंग हो सकती है।

आधार की जरूरत और कहां नहीं

  1. इनकम टैक्स फाइल करने के लिए आधार की आवश्यकता होगी।
  2. पैन कार्ड को आधार से लिंक करना होगा।
  3. प्राइवेट फर्म या कंपनी में आधार देने की कोई आवश्यकता नहीं होगी।
  4. बैंक अकाउंट को लिंक करने की जरूरत नहीं होगी।
  5. स्कूल में एडमिशन के लिए आवश्यकता नहीं होगी।
  6. मोबाइल नंबर को लिंक करने की आवश्यकता नहीं होगी।
  7. सरकार की लाभकारी योजनाओं और सब्सिडी का लाभ पाने के लिए होगी आधार की जरूरत
  8. सीबीएसई, नीट और यूजीसी की परीक्षाओं में आधार की जरूरत नहीं होगी।
  9. वहीं 14 साल से कम उम्र के बच्चों के पास आधार न होने की स्थिति में उन्हें राज्य सरकार द्वारा मिल रही सेवाओं से दूर नहीं किया जा सकता है।
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