सुप्रीम कोर्ट ने गुड़गांव के एक प्राइवेट अस्पताल पर 1.40 करोड़ का जुर्माना लगाया हैं. ये जुर्माना हत्या के आरोपी विधायक को बचाने के लिए लगाया हैं.

कोर्ट ने अदालत की अवमानना करने को लेकर अस्पताल के दो डॉक्टर पर ये जुर्माना लगाया हैं. कोर्ट ने डॉ. केएस सचदेवा को 70 लाख और मनीष प्रभाकर को 70 लाख रुपये का जुर्माना भरने का आदेश दिया हैं. दरअसल इन दोनों ने इनेलो के पूर्व विधायक बलबीर उर्फ बाली पहलवान को गिरफ्तारी से बचाने के लिए अपने अस्पताल में भर्ती रखा था. सीबीआई रिपोर्ट में खुलासा हुआ कि अस्पताल के मैनेजिंग डायरेक्टर केएस सचदेवा ने बाली पहलवान को सुख-सुविधाओं के साथ 527 दिनों तक हॉस्पिटल में रखा. इसमें उनकी मनीष प्रभाकर ने मदद की थी.

कलानौर थाना पुलिस ने 6 मई 2011 को बाली कार्यकर्ताओं पर विष्णु नामक व्यक्ति की गोली मारकर हत्या करने और हत्या के प्रयास का मामला दर्ज किया था. इस मामले में बाली गिरफ्तार हुए और पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट ने 11 फरवरी 2013 को उन्हें जमानत दे दी. शिकायतकर्ता बेल रद्द कराने सुप्रीम कोर्ट पहुंचे तो 24 अक्टूबर, 2013 को जमानत रद्द करते हुए आत्मसमर्पण के आदेश दिए गए.

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इस पर बाली खुद को बीमार बताते हुए गुड़गांव के अस्पताल में दाखिल हो गए. उनके खिलाफ गिरफ्तारी वारंट भी जारी हुए. फिर सीताराम ने सुप्रीम कोर्ट में अवमानना याचिका दायर की. इसमें कहा गया कि बाली को कोई बीमारी नहीं है. इस पर कोर्ट ने सीबीआई जांच को कहा. सीबीआई ने अपनी रिपोर्ट में बताया कि बाली पहलवान को कोई बीमारी नहीं है. वह अस्पताल के मैनेजिंग डायरेक्टर और मेडिकल अफसर की मदद से खुद को बीमार बता रहा है. बाद में सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर पुलिस ने बाली पहलवान को गिरफ्तार किया था.

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