नई दिल्ली: सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को भारत के मुसलमानों को पाकिस्तान भेजने वाली याचिका खारिज कर दी। सुनवाई के दौरान याचिका पर नाराजगी जताते हुए सुप्रीम कोर्ट की पीठ ने याचिकाकर्ता के वकील के खिलाफ निंदा प्रस्ताव पास करने की बात कही। इस बात पर वकील मामले की पैरवी करने से पीछे हट गया।

सुप्रीम कोर्ट ने इस याचिका को दाखिल करने वाले वकील से पूछा कि क्या आप वास्तव में इस मुद्दे पर बहस करना चाहते हैं? हम आपकी बात सुनेंगे लेकिन आपके खिलाफ निंदा प्रस्ताव पारित करेंगे। इसके बाद वकील ने इससे इनकार किया और बहस करने से हाथ खड़े कर दिए। वकील के जवाब के बाद कोर्ट ने इस याचिका को खारिज कर दिया।

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जस्टिस नरीमन ने याचिकाकर्ता के वकील याचिका में किए गए आवेदन को जोर-जोर से पढ़ने को कहा। इसके पास जज ने वकील से कहा, ‘क्या आप वास्तव में इस मुद्दे पर बहस करना चाहते हैं? हम आपकी बात सुनेंगे लेकिन आपके खिलाफ निंदा प्रस्ताव पारित करेंगे।’ इसके बाद वकील ने इस पर बहस करने से हाथ खड़े कर दिए। वकील के जवाब के बाद अदालत ने इस याचिका को खारिज कर दिया।

गौरतलब है कि भारत में 14.2 फीसदी मुस्लिम रहते हैं और भारत एक धर्मनिरपेक्ष राष्ट्र है। पिछले महीने सुप्रीम कोर्ट ने मेघालय हाईकोर्ट के एक फैसले में की गई टिप्पणी को लेकर दाखिल एक याचिका पर नोटिस जारी किया था। इसमें कहा गया कि पाकिस्तान ने खुद को एक इस्लामिक देश घोषित किया और भारत को धर्म के आधार पर विभाजित किया गया था, उसे भी हिंदू घोषित किया जाना चाहिए था देश लेकिन यह अभी तक एक धर्मनिरपेक्ष देश है।

चीफ जस्टिस रंजन गोगोई की पीठ ने मेघालय हाईकोर्ट के रजिस्ट्रार को नोटिस जारी कर जस्टिस सेन की टिप्पणी को हटाने को कहा गया था।

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