supreme court

सुप्रीम कोर्ट ने तीन तलाक पर अध्यादेश को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर सुनवाई से साफ इनकार कर दिया। CJI रंजन गोगोई ने याचिकाकर्ताओं को कहा कि आपके पास कोई तथ्य हो सकता है, लेकिन हम दखल नहीं देंगे।

खंडपीठ ने कहा कि अध्यादेश को दो महीने हो चुके हैं और ये छह महीने तक ही चलता है। साथ ही कोर्ट ने ये भी कहा कि संसद का शीतकालीन सत्र जल्दी ही होने वाला है। गौरतलब है कि 19 सितंबर, 2018 को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की कैबिनेट ने तीन तलाक (इंस्टैंट ट्रिपल तलाक) पर अध्‍यादेश को मंजूरी दी थी। जिसकी अवधि 6 महीनों की है।

मोदी कैबिनेट ने तीन तलाक से जुड़े बिल में 9 अगस्त को तीन संशोधन किए थे, जिसमें जमानत देने का अधिकार मजिस्ट्रेट के पास होगा और कोर्ट की इजाजत से समझौते का प्रावधन भी होगा। इस पर राष्ट्रपति ने भी मुहर लगा दी थी।

मुस्लिम परिवार में शादीे करने के इच्छुक है तो अभी फोटो देखकर अपना जीवन साथी चुने (फ्री)- क्लिक करें 

इंडियन एक्सप्रेस के मुताबिक समस्त केरल जमायत उलेमा नाम के एक मुस्लिम समूह ने याचिका दायर की थी। इसमें तर्क दिया गया था कि अध्यादेश ‘संविधान के अनुच्छेद 14, 15 और 21’ का उल्लंघन करता है और इस कारण से इसे खत्म करने की जरुरत है।

उन्होंने कहा था कि यह ‘संविधान के अनुच्छेद 123 की अनिवार्य आवश्यकताओं को भी पूरा करने में ये विफल है। इसलिए असंवैधानिक है।’ अनुच्छेद 123 केवल ‘तत्काल कार्रवाई’ की आवश्यकता वाले मामलों में अध्यादेश लाने की बात कहता है।

Loading...