गोरक्षा के नाम पर होने वाली भीड़ की हिंसा को गलत ठहराते हुए देश की सर्व्वोच अदालत ने मॉब लिंचिंग (भीड़ की हिंसा) से निपटने के लिए सरकार को अलग कानून बनाने की सलाह दी है।

कोर्ट ने अपने फैसले में कहा कि भीड़ की हिंसा को किसी भी स्थिति में बर्दाश्त नहीं किया जा सकता। कोई भी नागरिक कानून को अपने हाथ में नहीं ले सकता। इस मामले में अगली सुनवाई 28 अगस्त को मुकर्रर की गई है।

चीफ जस्टिस दीपक मिश्रा, जस्टिस एएम खानविलकर और डीवाई चंद्रचूड़ की सदस्यता वाली बेंच ने अपने फैसले में कहा कि राज्य और केन्द्र सरकार भविष्य में मॉब लिंचिंग की घटनाओं को रोकने के लिए सख्त कदम उठाएं।

बता दें कि बीते साल 6 सितंबर को सुप्रीम कोर्ट ने सभी राज्यों को गोरक्षा के नाम पर होने वाली हिंसा को रोकने के लिए सख्त कदम उठाने का निर्देश दिया था। साथ ही कोर्ट ने एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी को नोडल अफसर के तौर पर हर जिले में तैनात करने का निर्देश भी दिया था।

आज सुप्रीम कोर्ट ने राजस्थान, हरियाणा और उत्तर प्रदेश सरकारों से अभी तक कोई कारवाई नहीं करने पर जवाब मांगा है। साथ ही कोर्ट ने स्पष्ट शब्दों में कहा था कि कोई भी शख्स को कानून को हाथ में ले इसे बर्दाश्त नहीं जाएगा। कोर्ट ने कहा था कि इस मामले में दोषी को सख्त सजा मिलनी चाहिए।