नई दिल्ली | गुरुवार को सुप्रीम कोर्ट ने निजता के अधिकार को मौलिक अधिकार का दर्जा देकर मोदी सरकार को एक बड़ा झटका दिया. मोदी सरकार कोर्ट में लगातार इसका विरोध कर रही थी. इसके लिए उन्होंने 1954 और 1962 को कोर्ट के फैसले का भी संज्ञान भी दिया. लेकिन कोर्ट ने उनकी सभी दलीलों को ख़ारिज करते हुए निजता को मौलिक अधिकार का दर्जा दे दिया. सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद लगभग सभी राजनितिक दलों के बड़े नेताओं की प्रतिक्रिया आई, सिवाय प्रधानमंत्री मोदी के.

मोदी की चुप्पी सोशल मीडिया पर चर्चा का विषय बनी रही. रही सही कसर केन्द्रीय मंत्री रवि शंकर प्रसाद की प्रेस कांफ्रेंस ने पूरी कर दी. दरअसल रवि शंकर प्रसाद ने सुप्रीम कोर्ट के फैसले पर मोदी सरकार के पक्ष को रखा. उन्होंने कहा की हम सुप्रीम कोर्ट के फैसले का स्वागत करते है. कोर्ट ने उसी बात की पुष्टि की है जो हमने आधार विधेयक को संसद में पेश करते समय कही थी. हमने आधार को क़ानूनी अमलीजामा पहनाया है.

पूर्व की यूपीए सरकार पर निशाना साधते हुए रवि शंकर प्रसाद ने कहा की पूर्व सरकार बिना किसी कानून के आधार को लेकर आई थी जबकि हमने आधार डाटा की सुरक्षा के लिए क़ानूनी उपाय किये. रवि शंकर प्रसाद की प्रेस वार्ता के बाद सोशल मीडिया ने इसे मोदी सरकार का युटर्न करार दिया. यहाँ तक की सीपीएम् नेता सीता राम येचुरी ने ट्वीट कर लिखा,’ निजता के अधिकार पर सरकार के यू-टर्न की कोशिश वाली सरकारी मूर्खता मोदी और शाह की चुप्पी से और बढ़ गई है.’

उधर तीन तलाक पर सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद प्रधानमंत्री मोदी ने जिस तत्परता के साथ ट्वीट कर अपनी बात रखी , वो ही तत्परता आज गायब दिखी. इसको लेकर सोशल मीडिया पर भी खूब बात हुई. उधर सोनिया गाँधी ने कोर्ट के फैसले पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा यह वैयक्तिगत अधिकारों एवं मानवीय गरिमा के नये युग का संदेशवाहक है तथा आम आदमी के जीवन में राज्य एवं उसकी एजेंसियों द्वारा की जा रही निरंकुश घुसपैठ एवं निगरानी पर प्रहार है.

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