अयोध्या में बाबरी मस्जिद की विवादित जमीन पर मालिकाना हक़ को लेकर आज सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई शुरू होगी. सुप्रीम कोर्ट ने न्यायमूर्ति दीपक मिश्रा की अध्यक्षता में तीन न्यायाधीशों की पीठ गठित की है.

याद रहे इलाहाबाद हाई कोर्ट ने सात साल पहले इस विवादित जमीन का बंटवारा तीन बराबर हिस्सों में करने का आदेश दिया था, लेकिन किसी भी पक्ष को जमीन का बंटवारा स्वीकार नहीं है और सभी ने जमीन पर दावा पेश करते हुए हाई कोर्ट के फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी है.

इसी बीच अब शिया वक्फ बोर्ड ने भी अदालत में हलफ़नामा  में देकर बाबरी मस्जिद पर अपना अधिकर जताया है. बोर्ड ने हलफनामे में कहा कि कहा, 2010 में आए इलाहाबाद उच्‍च न्‍यायालय के फैसले के अनुसार जमीन के एक तिहाई हिस्से पर हक उनका है न कि सुन्नी वफ्फ बोर्ड का. बोर्ड की तरफ से दावा किया गया है कि बाबरी मस्जिद को मीर बांकी ने बनवाई था.

साथ ही हलफनामे में दावा किया गया कि अगर उन्हें मस्जिद बनाने के लिए दूसरी जगह दे दी जाए तो वे अपना जमीन पर से दावा छोड़ने के लिए भी तैयार है. बोर्ड ने यह भी कहा कि साल 1946 तक बाबरी मस्जिद उनके पास थी. अंग्रेजों ने गलत कानून प्रक्रिया से इसे सुन्नी वक्फ बोर्ड को दे दिया था.

हालांकि शिया वक्फ बोर्ड के इस कदम के खिलाफ शिया समुदाय खुद विरोध ने आ गया है. शियाओं के धर्मगुरुओं के संगठन मजलिस ए उलेमा ए हिन्द ने इस हलफनामे को शिया-सुन्नी में मतभेद डालने के लिए बीजेपी की साजिश करार दिया.

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