Monday, June 14, 2021

 

 

 

सुप्रीम कोर्ट ने मोदी सरकार को लगाई फटकार – युवाओं से क्यों ले रहे हो टीके के पैसे, कहां गए 35000 करोड़?

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को’रोना के टीकाकरण को लेकर देश भर में आलोचना का सामना कर रही मोदी सरकार को अब सुप्रीम कोर्ट ने भी कड़ी फटकार लगाई है। कोर्ट ने सीधा सवाल किया कि युवाओं को टीके के पैसे क्यों लिए जा रहे है। वै’क्सीन खरीद को लेकर तय की गई 35,000 करोड़ रुपये की राशि कहां गई।

कोर्ट ने अब केंद्र को टीकाकरण नीति के तहत 2021-22 के बजट में कोवि’ड-19 टीका खरीद को लेकर निर्धारित 35,000 करोड़ रुपये के कोष में से खर्च की गयी राशि के बारे में विस्तृत जानकारी देने को कहा है। सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र की कोविड टीकाकरण नीति को ‘प्रथम दृष्टया मनमानापूर्ण एवं अतार्किक’ करार भी दिया।

न्यायमूर्ति डी. वाई. चंद्रचूड़, न्यायमूर्ति एल. एन. राव और न्यायमूर्ति एस. रवींद्र भट की एक विशेष पीठ ने कहा , ‘‘वित्त वर्ष 2021-22 के केंद्रीय बजट में टीकों की खरीद के लिए 35,000 करोड़ रुपये निर्धारित किए गए हैं। उदारीकृत टीकाकरण नीति के संदर्भ में, केंद्र सरकार को यह स्पष्ट करने का निर्देश दिया जाता है कि इस कोष को अब तक कैसे खर्च किया गया है और 18-44 वर्ष की आयु के व्यक्तियों के टीकाकरण के लिए उनका उपयोग क्यों नहीं किया जा सकता है।’’

पीठ ने कहा कि केंद्र का तर्क है कि कॉम्पिटीशन को बढ़ावा देने के लिए उदारीकृत टीकाकरण नीति लाई गई है। यह ज्यादा प्राइवेट निर्माताओं को आकर्षित करेगा और इससे आखिरकार कीमतों में कमी आ सकती है। पीठ ने कहा, पहली नजर में, दो वैक्सीन मैनुफैक्चरर्स के साथ बातचीत को लेकर गुंजाइश सिर्फ कीमत और मात्रा थी। जबकि दोनों ही केंद्र सरकार द्वारा पहले से तय किए गए हैं। ऐसे में कॉम्पिटीशन के चलते ज्यादा कीमत को लेकर भारत सरकार का जो तर्क है, उसको लेकर गंभीर संदेह पैदा होता है।

कोर्ट ने कहा कि केंद्र सरकार का तर्क है कि बड़े स्तर पर खरीद ऑर्डर की उसकी क्षमता से वैक्सीन की कीमतें कम हुई। इससे सवाल उठता है कि आखिर इस तर्क को 100 प्रतिशत मासिक सीडीएल खुराकों की खरीद के लिए क्यों नहीं अपनाया गया।

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