बीएसएफ द्वारा शरणार्थियों को भारत में प्रवेश से रोकने और उनके खिलाफ हथगोलों का प्रयोग करने को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को केंद्र सरकार से जवाब तलब किया है.

प्रधान न्यायाधीश दीपक मिश्रा की अध्यक्षता वाली पीठ ने केंद्र को 4 सप्ताह में जवाब देने को कहा है. दरअसल दो रोहिंग्या शरणार्थियों ने बीएसएफ द्वारा बच्चों, विकलांगों और गर्भवती महिलाओं सहित शरणार्थियों को भारत में घुसने से जबरन रोकने का आरोप लगाया है.

इस दौरान रोहिंग्या शरणार्थियों की ओर से पेश हुए वकील प्रशांत भूषण ने आरोप लगाया कि बीएसएफ असहाय शरणार्थियों को ‘अमानवीय और निंदनीय तरीके से’ वापस भेज रहा है. इस दौरान केंद्र की तरफ से जवाब देते हुए एडिशमल सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कहा है कि हम भारत को शरणार्थियों की राजधानी नहीं बनाना चाहते. इसलिए सरकार को यह मामला संभालने दें.

इसी के साथ राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग ने रोहिंग्या प्रवासियों के लिए शिक्षा और स्वास्थ्य सेवा सहित बुनियादी सुविधाओं की मांग करते हुए कहा कि ऐसी मांग करने का अधिकार उनके पास है.

वरिष्ठ वकील गोपाल सुब्रमणयम नेकहा कि पूरी दुनिया में रह रहे रिफ्यूजी के पास यह अधिकार है और भारतीय सुप्रीम कोर्ट इतना संवेदनशील है कि वो शरणार्थियों के लिए कम मानक लागू नहीं करेगा. इससे पहले राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग ने केंद्र के 8 अगस्त को जारी किए उस सर्कुलर का विरोध कर चूका है. जिसमे रोहिंग्या शरणार्थियों को देश से निकालने के लिए कहा गया था.

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