असम में नेशनल रजिस्‍ट्रर ऑफ स्‍टीजन (एनआरसी) के मामले की सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को ड्राफ्ट से बाहर रहे लगभग 40 लाख लोगों का जिले के अनुसार पर्सेंटेज मांगा है। कोर्ट ने एनआरसी के समन्वयक से कहा कि राज्य में एनआरसी मसौदे से बाहर रखी गयी आबादी के जिलेवार प्रतिशत का आंकड़ा उसके समक्ष पेश करे।

न्यायमूर्ति रंजन गोगोई, न्यायमूर्ति नवीन सिन्हा और न्यायमूर्ति के. एम. जोसफ की पीठ ने ऑल असम स्टूडेंट्स यूनियन, ऑल असम माइनोरिटी स्टूडेंट्स यूनियन और जमायत-ए उलेमा हिंद से 25 अगस्त तक एनआरसी मुद्दे के केंद्र की मानक संचालन प्रक्रिया (एसओपी) पर जवाब मांगा। कोर्ट ने साफ किया कि SOP को लेकर किसी भी राजनीतिक दलों के सुझाव नहीं सुने जाएंगे।

कोर्ट ने कॉरिडनेटर प्रतीक हजेला को कहा कि वो NRC मसौदा की प्रतियां पंचायत ऑफिस और अन्य दफ्तरों में रखें ताकि लोग इसे देख सकें। बेंच ने कहा कि फॉर्म जमा करने का काम पहले से निर्धारित 30 अगस्त से 28 सितंबर तक जारी रहेगा। क्लेम करने की इच्छा रखने वाले लोगों को 28 अगस्त को फॉर्म दिया जाएगा। इस मामले की अगली सुनवाई 28 अगस्त अगली सुनवाई होगी।

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NRC में छोड़े गए लोगों की आशंका को खारिज करते हुए केंद्र ने कहा कि अंतिम NRC दावों की सुनवाई के बाद जारी होगा और आपत्तियों को उचित प्रक्रिया के बाद इसे पूरा किया जाएगा। यह कहा गया है कि दावों की जांच करने वाले अधिकारी यह सुनिश्चित करने के लिए बहुत सावधानी बरतेंगे कि अंतिम एनआरसी में कोई अवैध व्यक्ति का नाम शामिल नहीं है।

असम के पूरे राज्य में अब 55,000 प्रशासनिक अधिकारी दावों और आपत्तियों से निपटने के लिए लगे रहेंगे। दावों और आपत्तियों, नोटिस और सुनवाई जारी करने के चरण के दौरान पर्याप्त समय दिया जाएगा ताकि अधिकारियों द्वारा उचित परीक्षण किया जा सके। इसमें कहा गया है कि सुनवाई के दौरान असम सरकार ने कहा था कि भारत के विशिष्ट पहचान प्राधिकरण (यूआईडीएआई) के सहयोग से एनआरसी के सभी आवेदकों के बॉयोमीट्रिक नामांकन की प्रक्रिया करेगी।

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