खाप पंचायतों पर बेहद सख्त रुख अपनाते हुए सुप्रीम कोर्ट ने साफ़ कर दिया कि दो बालिगों की शादी में किसी को दखल देने का कोई अधिकार नहीं है.

झूठी शान के नाम पर होने वाली हत्याओं यानी ऑनर किलिंग्स पर बैन लगाने की मांग वाली याचिका पर सुनवाई करते हुए चीफ जस्टिस दीपक मिश्रा ने कहा, “चाहे वे पैरेंट्स हों, समाज हो या कोई और वे सब इससे अलग हैं. किसी को भी चाहे वह कोई एक शख्स हो, एक से अधिक लोग हों या समूह उन्हें (बालिगों की) शादी में दखल का हक नहीं है.”

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ध्यान रहे सुप्रीम कोर्ट एनजीओ शक्ति वाहिनी की पिटीशन पर सुनवाई कर रहा था, जिसमे मांग की गई थी कि उत्तर भारत खासतौर पर हरियाणा में कानून की तरह काम कर रही खाप पंचायतें या गांव की अदालतें परिवार की मर्जी के खिलाफ शादी करने वालों को सजा देती हैं. जिस पर रोक लगनी चाहिए.

कोर्ट ने यह भी कहा कि अगर कोई दो बालिग शादी कर भी लेते हैं, जो रिश्ते के तय नियम से परे है तो उसे अमान्य घोषित करने का हक सिर्फ कानून को है. खाप पंचायत या पैरेंट्स ऐसे जोड़े के खिलाफ हिंसा नहीं कर सकते.

सुप्रीम कोर्ट ने खाप की पैरवी करते वकील से बेहद सख्त लफ्ज़ में कहा, ‘कोई शादी वैध है या अवैध, यह फैसला बस अदालत ही कर सकती है. आप इससे दूर रहें.’ अब इस मामले की सुनवाई 16 फरवरी को होगी.

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