लखनऊ. ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड (AIMPLB) के अयोध्या पर सुप्रीम कोर्ट के फैसले के खिलाफ पुनर्विचार याचिका दाखिल करने के फैसले में मामले में पक्षकार रहे सुन्नी सेंट्रल वक्फ बोर्ड ने साथ देने से इनकार कर दिया है।

सुन्नी वक्फ बोर्ड के अध्यक्ष जफर फारूकी ने कहा कि मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड ने भले ही बोर्ड अयोध्या मामले में सुप्रीम कोर्ट के निर्णय पर पुनर्विचार याचिका दायर करने का फैसला किया हो, मगर सुन्नी वक्फ बोर्ड ऐसा नहीं करने के अपने रुख पर अब भी कायम है।

उन्होंने कहा कि जब फैसला आने से पहले ही पर्सनल लॉ बोर्ड बार-बार कह रहा था कि वह सुप्रीम कोर्ट के किसी भी निर्णय को मानेगा तो अब अपील क्यों की जा रही है।फारूकी ने कहा कि जहां तक बाबरी मस्जिद (Babari Masjid) के बदले जमीन लेने का सवाल है तो उस पर वक्फ बोर्ड की एक और बैठक आगामी 26 नवंबर को होने वाली है। इसी बैठक में ही कोई फैसला किया जाएगा।

गौरतलब है कि पर्सनल लॉ बोर्ड की वर्किंग कमेटी की रविवार (17 नवंबर) को लखनऊ में हुई आपात बैठक में अयोध्या मामले पर सुप्रीम कोर्ट के फैसले के खिलाफ पुनर्विचार याचिका दाखिल करने और बाबरी मस्जिद के बदले किसी और जगह जमीन न लेने का निर्णय लिया गया।

सचिव जफरयाब जिलानी और मौलाना उमरेन महफूज रहमानी ने कहा कि 30 दिन के भीतर पुनर्विचार याचिका दाखिल कर दी जाएगी। इतना ही नहीं बोर्ड की तरफ से राजीव धवन ही वकील होंगे। मुमताज पीजी कॉलेज में हुई बैठक के बाद जिलानी और रहमानी ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट का फैसला समझ से परे, अनुचित और विरोधाभासी है। हम इंसाफ के लिए सुप्रीम कोर्ट गए थे, न कि कहीं और थोड़ी से जमीन लेने के लिए। मस्जिद की जमीन अल्लाह की होती है। शरीयत के मुताबिक हम दूसरी जमीन कबूल नहीं कर सकते।

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