Friday, August 6, 2021

 

 

 

अयोध्या केस में सुन्‍नी वक्‍फ बोर्ड ने मध्‍यस्‍थता करने की बताई ये वजह

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उत्‍तर प्रदेश में अयोध्या जमीन विवाद मामले में सुप्रीम कोर्ट की सुनवाई पूरी होने और फैसला आने की ठीक बीच उत्‍तर प्रदेश सुन्‍नी सेंट्रल वक्‍फ बोर्ड ने मध्‍यस्‍थता की पेशकश करने पर सफाई दी है।

बोर्ड के अध्‍यक्ष जुफर फारूकी ने रविवार को कहा है कि बोर्ड ने अपने सभी सदस्‍यों के साथ वार्ता करके मध्‍यस्‍थता पैनल के समक्ष प्रस्‍ताव रखा था। उन्होंने कहा है कि अयोध्‍या का मुद्दा बेहद संवेदनशील है और उससे संबंधित अहम पक्षकारों का रुख मुल्‍क के भविष्‍य पर असर डाल सकता है, लिहाजा इसे बेहद सलीके से संभालना होगा।

फारूकी ने कहा कि उन्हें विश्वास है कि सर्वोच्च न्यायालय इस मामले पर ‘मुकम्‍मल इंसाफ’ करेगा। अभी भी लोग हमारे इस प्रस्ताव का समर्थन कर रहे हैं। मध्‍यस्‍थता पैनल को दिये गये प्रस्‍ताव का खुलासा नहीं कर सकते हैं। इसी सील बंद लिफाफे में दिया गया है।

मीडिया से बातचीत के दौरान फारूकी ने कहा कि जो प्रस्ताव दिया गया है उसका अर्थ यह नहीं कि हम जमीन विवाद से पीछे हट रहे हैं। कोर्ट ने सभी पक्षों से मांगा है। अयोध्‍या मामले में प्रमुख पक्षकार सुन्‍नी वक्‍फ बोर्ड ने मध्‍यस्‍थता पैनल के सामने एक प्रस्‍ताव रखा है।

वहीं दूसरी तरफ शाहिद रिजवी ने कहा कि बोर्ड ने कुछ शर्तों पर बाबरी मस्जिद की जमीन से दावा छोड़ने को कहा है। लेकिन कई लोग इसका विरोध कर रहे हैं। अंत में उन्होंने कहा कि अदालत जो भी फैसला करेगी वो हमें मंजूर होगा।

हालांकि बोर्ड के इस कदम का बाकी मुस्लिम पक्षकारों ने विरोध किया है। जमीयत उलेमा-ए-हिन्द के अध्यक्ष मौलाना अरशद मदनी ने सुन्नी वक्फ बोर्ड की पेशकश के बारे में कहा, ”वक्फ बोर्ड का प्रमुख जमीन का मालिक नहीं होता है, बल्कि वह देखभाल करने वाला होता है। इस मामले में हमें कोई समझौता मंजूर नहीं होगा। अदालत जो भी फैसला करेगी वो हमें मंजूर होगा।”

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