Tuesday, October 26, 2021

 

 

 

सुन्नी वक्फ बोर्ड ने राम चबूतरा का जन्म स्थान नहीं स्वीकारा

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उच्चतम न्यायालय (सुप्रीम कोर्ट) में चल रही अयोध्या मामले की बुधवार को सुनवाई के दौरान सुन्नी वक्फ बोर्ड ने बुधवार को साफ किया कि उसने राम चबूतरा को भगवान के जन्मस्थान के तौर पर स्वीकार नहीं किया है।

बुधवार को सुन्नी वक्फ बोर्ड की ओर से वकील जफरयाब जिलानी ने अपनी दलीलें शुरू कीं। जिलानी ने कहा कि सुन्नी वक्फ बोर्ड ने यह बिल्कुल स्वीकार नहीं किया कि राम चबूतरा भगवान राम का जन्मस्थान है।

वह बोले, हमारा कहना यह है कि यह हिंदुओं का विश्वास है और जिला न्यायाधीश की इस मामले में निगरानी के बाद हमने इस संदर्भ में कोई कदम नहीं उठाया। न्यायाधीश ने कहा था कि ये राम चबूतरा भगवान राम का जन्मस्थान है। हमने कभी अपनी ओर से नहीं कहा कि ये जन्मस्थान है।

जिलानी के मुताबिक, 1885 में फैजाबाद जिला जज ने कहा था कि इस स्थल को हिंदू राम का जन्मस्थान मानकर पूजा करते हैं। राम चबूतरा विवादित स्थल के बाहरी हिस्से में है जो बाबरी मस्जिद वाली जगह से 60 फीट दूर है। मंगलवार को सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट जज जस्टिस एसए बोबड़े ने जिलानी से पूछा था, ‘क्या आपको चबूतरा के जन्मस्थान होने पर आपत्ति नहीं है?’ जिलानी ने कहा, ‘शुरुआत में हमें थी। लेकिन जिला जज ने कहा कि इसे जन्मस्थान मानकर इसकी पूजा की जाती रही है।’

babri masjid

इससे पहले मंगलवार को 30वें दिन की सुनवाई में मुस्लिम पक्ष के वकील राजीव धवन ने कहा था कि महज विश्वास के आधार पर यह स्पष्ट नहीं होता कि अयोध्या में मंदिर था। भारत में यह फैलाना आसान है कि किसी देवता का अमुक स्थान है। मैं मानता हूं कि भारत में पूजा की कई मान्यताएं हैं। लेकिन, अयोध्या में रेलिंग के पास जाकर पूजा किए जाने से उसे मंदिर नहीं मानना चाहिए।

धवन ने दलील दी थी कि 1528 में मस्जिद बनाई गई थी और 22 दिसंबर 1949 तक वहां लगातार नमाज हुई। वहां तब तक अंदर कोई मूर्ति नहीं थी। उन्होंने इलाहाबाद हाईकोर्ट के दो जजों के फैसलों के हवाले से मुस्लिम पक्ष के कब्जे की बात कही। उन्होंने कहा था कि बाहरी अहाते पर ही उनका अधिकार था। दोनों पक्षकारों के पास 1885 से पुराने राजस्व रिकॉर्ड भी नहीं हैं।

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