लखनऊ:  आतंकवाद का हमेशा से विरोध करने वाली बरेली की दरगाह आलाहजरत ने एक बार फिर आतंकवाद के खिलाफ फतवा जारी किया है. दुनियाभर में आतंक का पर्याय बने आईएसआईएस की विचारधारा को भी मुसलमानों के लिए हराम और नाजायज करार दिया है.

इस फतवे में मुसलमानों से आईएसआईएस और उसकी हर गतिविधि से बचने का आह्वान किया है. इतना ही नहीं आतंकी संगठनों की और से जारी मैसेज, वीडिओ और साहित्य को देखना और पढ़ना भी हराम बताया गया है. जयपुर के रहने वाले कौसर रजा खान के सवाल के जवाब में दरगाह से जुड़े दारुल इफ्ता मंजरे इस्लाम के मुफ़्ती मोहम्मद सलीम नूरी ने फतवा जारी किया.

दुनिया में अमन और भाईचारे का पैगाम देने वाली बरेली की प्रसिद्ध दरगाह आला हजरत ने आईएसआईएस के खिलाफ कड़ा फैसला लिया है. जयपुर के कौसर ने सवाल किया था कि आतंकी संगठन आईएसआईएस आए दिन सोशल मीडिया के माध्यम से गुमराह करने का लिटरेचर डालता है और नौजवानों को खून-खराबे और मारकाट और इस्लाम विरोधी विचारधारा से जोड़ने का काम करता है. कौसर ने सवाल किया था कि ऐसे लिटरेचर को पढ़ना शरीअत के हिसाब से कैसा है.

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सवाल के जवाब में मुफ़्ती मो सलीम नूरी ने फतवा जारी करते हुए कहा कि अब आईएसआईएस की विचाधारा को कोई भी मुसलमान नहीं पढ़ेगा क्योंकि ये विचारधारा शरीयत के खिलाफ हैं इसके साथ ही आईएसआईएस और अन्य आतंकी संगठनों के मैसेज और वीडियो देखना और इसका प्रचार प्रसार करना भी हराम है. साभार: न्यूज़ 18

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