देवास | करीब 9 साल पुराने सुनील जोशी हत्याकांड के मामले में अदालत ने साध्वी प्रज्ञा और 7 अन्य आरोपियों को बरी कर कर दिया है. सुनील जोशी आरएसएस के प्रचारक थे जिनकी 2007 को गोली मारकर हत्या कर दी गयी थी. इस मामले में पुलिस ने साध्वी प्रज्ञा समेत सात लोगो को आरोपी बनाया था. भगवा आंतंकवाद के सबूत की एक कड़ी माने जा रहे सुनील जोशी की हत्या का रहस्य अदालत के फैसले पर जस का तस बना हुआ है.

देवास की एक अदालत ने आरएसएस से जीवन भर जुड़े रहे सुनील जोशी हत्याकांड के मामले में साध्वी प्रज्ञा को बरी करने का आदेश दिया. सुनील जोशी को 29 दिसम्बर 2007 के दिन देवास के चुना खादन इलाके में स्थिति उनके घर के पास ही गोली मार दी गयी थी. सुनील जोशी की हत्या के बाद पुरे देवास में हिंसा फ़ैल गयी और एक खास समुदाय के लोगो को निशाने पर लिया गया.

मुस्लिम परिवार में शादीे करने के इच्छुक है तो अभी फोटो देखकर अपना जीवन साथी चुने (फ्री)- क्लिक करें 

इस हिंसा में एक ही परिवार के चार लोगो की हत्या कर दी गयी. सुनील जोशी की हत्या ने इलाके में संप्रदायिक तनाव पैदा कर दिया. संप्रदायिक हिंसा से यह सन्देश गया की सुनील जोशी की हत्या दुसरे समुदाय के लोगो ने की है. लेकिन देवास पुलिस की जांच में शक सुनील जोशी के कुछ सहयोगियों के ऊपर भी गया. पुलिस को शक था की भगवा आतंकवाद के सबूत मिटाने के लिए उनकी हत्या की जा सकती है.

पुलिस को सुनील के उन सहयोगियों पर शक हुआ जो समझौता एक्सप्रेस बम विस्फोट में आरोपी थे. बाद देवास पुलिस ने साध्वी प्रज्ञा और सात अन्य लोगो को इस मामले में गिरफ्तार किया. साल 2011 में युपीए सरकार ने इस मामले को एनआईए को सौप दिया. लेकिन 2014 में मोदी सरकार आते ही एनआईए ने भोपाल की स्पेशल कोर्ट में चार्जशीट दाखिल की. चार्जशीट में NIA ने माना की इस मामले का दक्ष‍िणपंथी आतंकी समूहों से कोई जुडाव नही है.

बाद में यह केस देवास कोर्ट को रेफर कर दिया गया. देवास की अदालत ने पुलिस की जांच के आधार पर साध्वी और अन्य लोगो को आरोपी बनाया.

Loading...