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आल इंडिया सुन्नी स्कॉलर एसोसिएशन के सचिव एपी अबुबकर मुसलियार ने मिस्र की राजधानी काहिरा में राष्ट्रपति अब्दुल फतह सीसी द्वारा आयोजित आतंकवाद के खिलाफ अंतर्राष्ट्रीय विद्वानों की बैठक में भारत का प्रतिनिधित्व किया.

तीन दिवसीय इस सम्मेलन में विश्व भर के प्रसिद्ध विद्वानों ने हिस्सा लिया, यह सम्मलेन “समाज को स्थिर करने में फतवों की भूमिका” पर आयोजित हुआ. सम्मेलन को संबोधित करते हुए मुसलियार ने कहा, विभिन्न सलफ़ी आंदोलनों जो इस्लाम और आतंकवाद के बीच असंबद्ध होने का प्रयास करते हैं और इस्लाम के नाम पर मानवता के खिलाफ हिंसक कृत्यों का औचित्य साबित करने का प्रयास कर रहे हैं. उन्होंने इस्लाम के सच्चे ज्ञान विज्ञान और फतवों को खारिज कर दिया है.

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उन्होंने कहा, ऐतिहासिक रूप से, सूफी इस्लाम के समर्थकों ने हमेशा अपने बुनियादी सिद्धांतों के साथ न्याय करते हु एअपने वास्तविक स्वरूप में इस्लाम का प्रचार किया. उन्होंने बताया, परंपरागत मार्ग अपनाने वाले विद्वानों से दुनिया भर के मुसलमानों को इस्लाम का शांतिपूर्ण संदेश मिला है.

मुसलियार ने फतवों का समर्थन करते हुए कहा कि “फतवों  ने इस्लामी ज्ञान प्रणाली और मुस्लिम संस्कृति को विकसित करने में एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है. जिससे इस्लामिक ज्ञान परंपरा हजारों पुस्तकों के रूप में एक व्यवस्थित तरीके से उभरी है. उन्होंने कहा, यह अच्छी तरह से संरचित और व्यापक इस्लामी ज्ञान परंपरा कुरान और भविष्यवाणियों की वास्तविक व्याख्या प्रदान करती है.

उन्होंने कहा, इस्लाम के भीतर एक अच्छी तरह परिपक्व ज्ञान परंपरा के अस्तित्व को देखते हुए, कुरान की गलत व्याख्या के लिए कोई जगह नहीं है, यह काम आतंकवादियों द्वारा किया जा रहा है जो खुद को इस्लाम के प्रतिनिधित्व के रूप में पेश करते है.

इस सम्मेलन में एम्स्टर्डम यूनिवर्सिटी के अध्यक्ष मंसूक औलद अब्दुल्ला, थबा फाउंडेशन के संस्थापक हबीब अली जिफरी, संयुक्त अरब अमीरात के धार्मिक विभाग के प्रतिनिधि मोहम्मद मथवारल काबी, मोहम्मद क़लाहेला, जॉर्डन के मुफ्ती, सलाह मुजीब, चेचनिया के मुफ्ती सहित 60 देशों के प्रमुख विद्वानों ने भाग लिया.