हजरत ख्वाजा मोईनुद्दीन हसन चिश्ती (रह.) के उर्स के मौके पर सूफी उलेमाओं ने एक स्वर में प्रधानमंत्री से पुरे देश में  बीफ पर पूरी तरह से पाबंदी लगाने की मांग की हैं.

सूफी मौलवियों ने कहा कि बीफ के चलते देश में हिंदुओं और मुसलमानों के बीच सौहार्द बिगड़ रहा हैं. ऐसे में गौमांस खाने और बेचने के आरोप में मुस्लिम युवाओं को उत्पीड़न से बचाने के लिए सभी प्रकार के बीफ को बैन कर देना चाहिए. सूफी उलेमाओं ने कहा,  प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को करोड़ो मुसलमानों को राहत देने के लिए इस पर अध्यादेश लाना चाहिए.

दरगाह दीवान सैयद जैनुल आबदीन ने ऐलान करते हुए गोमांस का सेवन न करने की कसम खाई हैं. उन्होंने कहा कि मैं और मेरा परिवार गोमांस न खाने की घोषणा करता हूं. उन्होंने कहा कि गाय सिर्फ एक जानवर नहीं है बल्कि हिंदुओं की आस्था का प्रतीक भी है. गाय और गाय के वंश को बचाना चाहिए, इसके अलावा गाय को राष्ट्रीय पशु घोषित कर देना चाहिए.

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वहीँ कर्नाटक की ख्वाजा बंदा नवाज दरगाह के सज्जादानशीं मोहम्मद शब्बीरुल हस ने कहा कि यह सच है कि सिर्फ मुसलमान ही मांसाहारी नहीं हैं. वो बस आम जनता कि एक राय है .दिल्ली की हजरत निजामुद्दीन औलिया दरगाह के अलावा कर्नाटक के गुलबर्गा शरीफ, आध्र प्रदेश के हलकट्टा शरीफ और नगौर, बरेली, कलियार, भागलपुर, जयपुर और फुलवारी जैसी दरगाहों के मौलवियों ने भी इस मांग का समर्थन किया है.

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