नई दिल्ली: पुलवामा में हुए आतंकी हमले के जवाब में जबवायुसेना पाकिस्तान के बालाकोट में एयर स्ट्राइक कर जैश-ए-मोहम्मद के कैंपों को निशाना बना रही थी, उसी दौरान भारतीय सेना ने पूर्वोत्तर में दुश्मनों के खिलाफ मोर्चा खोला रखा था।  इस दौरान भारत और म्यांमार फौज के ज्वाइंट ऑपरेशन में भारत-म्यांमार बॉर्डर पर एक्टिव आतंकियों और उनके कैम्प का खात्मा कर दिया है। ये मिशन 17 फरवरी से 2 मार्च तक चला था।

भारतीय सेना ने म्यांमार को अभियान के लिए हार्डवेयर और उपकरण मुहैया कराए, जबकि इसने सीमा पर बड़ी संख्या में बलों को तैनात किया, यह अभियान इस बात की जानकारी मिलने के बाद चलाया गया कि उग्रवादी कोलकाता को समुद्र मार्ग के जरिए म्यांमार के सितवे से जोड़ने वाली विशाल अवसंरचना परियोजना निशाना बना रहे हैं।

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यह परियोजना कोलकाता से सितवे के रास्ते मिजोरम पहुंचने के लिए एक अलग मार्ग मुहैया कराने वाली है। यह परियोजना 2020 तक पूरी होने वाली है। ये एक ट्रांजिट प्रोजेक्ट है जो कोलकाता के हल्दिया पोर्ट को म्यांमार के सित्वे पोर्ट से जोड़ेगा। इस प्रोजेक्ट के पूरा होने के बाद मिजोरम म्यांमार से से जुड़ जाएगा। इस प्रोजेक्ट की अहमियता का अंदाजा इससे लगाया जा सकता है कि इससे म्यांमार से मिजोरम की दूरी एक हजार किलोमीटर कम हो जाएगी।

कालादन प्रोजेक्ट पर मंडराते खतरे को देखते हुए भारतीय सेना ने मिजोरम से लगी दक्षिणी म्यांमार की सीमा के भीतर स्थित आतंकी कैंप को खत्म करने का फैसला किया। यह ग्रुप म्यांमार से ही अपनी गतिविधियां संचालित कर रहा था और काचिन इंडिपेंडेंस आर्मी से जुड़ा था, जिसके तार चीन से जुड़े रहे हैं।’

इससे पहले जनवरी के अंत में म्यांमार सेना ने ‘फ्लशिंग आउट’ ऑपरेशन चलाकर अपनी सीमा में स्थित सागाइंग इलाके के तागा में दहशतगर्द समूहों के ठिकानों पर हमले किए थे। यहीं पर भारत में सक्रिय अतिवादी संगठनों एनएससीएन (खापलांग) और उल्फा (आई) ने भी अपने ठिकाने बना रखे हैं।

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