आरएसएस कार्यकर्ता मोहम्मद आमिर राशिद की और से अलीगढ मुस्लिम यूनिवर्सिटी में आरएसएस की शाखा लगाने की मांग को ख़ारिज कर दिया गया है. विश्वविद्यालय के प्रवक्ता प्रोफेसर शाफे किदवाई ने कहा कि वि​श्वविद्यालय किसी भी राजनीतिक दल या संगठन के कैम्प या शाखा को परिसर में लगाये जाने के प्रस्ताव की इजाजत नहीं देगा.

इसके अलावा उन्होंने बीजेपी सांसद सतीश गौतम ने अमुविवि के छात्रसंघ भवन में पाकिस्तान के संस्थापक मोहम्मद अली जिन्ना की तस्वीर को लेकर लिखे गए पत्र के बारे में कहा कि सांसद का पत्र कुलपति कार्यालय को अभी तक नहीं मिला है.

इस मुद्दें पर उन्होंने कहा कि अमुविवि की बहुत पुरानी परम्परा है कि वह प्रमुख राजनीतिक, सामाजिक और शिक्षा के क्षेत्र की महान शख्सियतों को आजीवन सदस्यता देता है. रिकार्ड के अनुसार पहली आजीवन सदस्यता महात्मा गांधी को 29 अक्टूबर 1920 को दी गयी थी.

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आजीवन सदस्यता पाने वाली महान हस्तियों की सूची में सी राजगोपाल चारी, पंडित जवाहर लाल नेहरू, सरोजिनी नायडू, डा सीवी रमन, प्रसिद्ध ब्रिटिश लेखक इ. एम. फोरस्टर शामिल हैं. उन्होंने बताया कि जिन्ना को भी अमुविवि छात्र संघ की आजीवन सदस्यता 1938 में दी गयी थी. जिन्ना वि​श्वविद्यालय कोर्ट के संस्थापक सदस्य थे. और उन्होंने दान भी दिया था. उन्हें सदस्यता उस समय दी गयी थी जब मुस्लिम लीग ने पाकिस्तान की मांग नहीं उठायी थी.

उन्होंने कहा कि सभी आजीवन सदस्यता वाली हस्तियों की फोटो छात्र संघ में लगायी जाती थी. आजादी के बाद भी किसी भी प्रमुख हस्ती महात्मा गांधी, मौलाना आजाद, डा राधा कृष्णन, राजगोपाल चारी, डा राजेंद्र प्रसाद और पंडित नेहरू ने कभी भी इस मुद्दे को नहीं उठाया.

प्रवक्ता ने कहा कि यह फोटोग्राफ अविभाजित भारत की विरासत की बहुमूल्य निशानी है और किसी ने कभी इस मुद्दे को ना तो उठाया और ना ही विरोध जताया. उन्होंने कहा कि अमुविवि छात्रसंघ एक स्वतंत्र इकाई है और इसे वि​श्वविद्यालय के संविधान के दायरे में कुछ स्वायत्तता मिली हुई है. कोई भी कुलपति या गर्वनिंग बाडी इसमें दखल नहीं देता है.

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