उत्तर प्रदेश के गोरखपुर जिले में बाबा राघव दास मेडिकल कॉलेज (बीआरडी) में आठ माह पहले हुए ऑक्सीजन कांड में बच्चों की मौत के मामले में गिरफ्तार किये गए डॉक्टरों की गिरफ्तारी को लेकर अब इंडियन मेडिकल असोसिएशन विरोध में आ गया है.

आईएमए गोरखपुर के पदाधिकारियों ने डॉक्टर राजीव मिश्रा, डॉक्टर सतीश और डॉक्टर कफील की गिरफ्तारी को साजिश बताते हुए गोरखपुर से लखनऊ तक के अधिकारियों पर साजिश का आरोप लगाया है.

आईएमए के सचिव डॉ. आरपी शुक्ल ने कहा कि ऑक्सीजन की कमी प्रशासनिक उदासीनता, असंवेदनशीलता व संभावति भ्रष्टाचार के कारण हुई. इसके लिए लखनऊ से लेकर गोरखपुर तक के सभी अधिकारी दोषी हैं. इनके पास समस्या से निपटने के पर्याप्त अधिकार थे. लेकिन सीमित साधन और अधिकार के साथ व्यवस्था संभाल रहे डॉक्टरों को दोषी बताकर उन्हें जेल में डाल दिया गया.

पदाधिकारियों ने कहा कि सरकार एक तरफ मौतों के पीछे ऑक्सीजन की कमी को कारण नहीं मान रही है, वहीं दूसरी तरफ डॉक्टरों पर गंभीर धाराओं में केस दर्ज कर कार्रवाई कर रही है. आठ महीनों से दोषी डॉक्टरों को जमानत भी नहीं दी जा रही है. इससे सरकार की मंशा पर सवाल खड़े होते हैं. डॉ. शुक्ल ने प्रदेश के बाहर की उच्चस्तरीय समित से पूरे प्रकरण की जांच कराने की मांग की है.

बीआरडी ऑक्सिजनकांड में करीब आठ महीने से जेल में बंद डॉ कफील खान की पत्नी डॉ शबिस्ता खान ने बताया कि घटना वाले दिन वह छुट्टी पर थे. उन्होंने कहा कि डॉक्टर कफील एनएचएम के नोडल ऑफिसर थे. उनका ऑक्सीजन सप्लाई से लेना-देना नहीं था लेकिन इसके बाद भी 10 अगस्त की रात अस्पताल में वॉट्सऐप ग्रुप पर ऑक्सिजन की कमी होने से जुड़े मैसेज पर वह हालात देखने अस्पताल पहुंचे. उन्होंने कई सीनियर डॉक्टरों को इसकी सूचना भी दी लेकिन इसे गंभीरता से नहीं लिया गया.

यही नहीं, शबिस्ता खान ने आरोप लगाया कि डॉ. कफील ने बाल रोग की विभागाध्यक्ष डॉ. महिमा मित्तल को पहले ही ऑक्सिजन की कमी की सूचना दी थी लेकिन इस पर संज्ञान नहीं लिया. उन्होंने बताया कि 10 अगस्त की घटना के बाद भी विभागाध्यक्ष छुट्टी लेकर चली गईं और सारा दोष डॉ. कफील पर आ गया.

कोहराम न्यूज़ को सुचारू रूप से चलाने के लिए मदद की ज़रूरत है, डोनेशन देकर मदद करें




Loading...

कोहराम न्यूज़ की एंड्राइड ऐप इनस्टॉल करें