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मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के गृहक्षेत्र गोरखपुर के बीआरडी मेडिकल कॉलेज में ऑक्सीजन की कमी से बच्चों की मौत के मामले में आरोपी बनाए गए डॉ कफील खान ने अब अपना निलंबन रद्द करने और नौकरी बहाल करने की मांग की है.

पेडियाट्रिक्स विभाग में सहायक व्याख्याता के रूप में सेवारत डॉ कफील खान को 8 महीनें जेल में रहने के बाद हाई कोर्ट से जमानत मिल गई है. हाईकोर्ट ने अपने आदेश में कहा है कि डॉ. कफील के खिलाफ मेडिकल नेग्लिजेंस या भ्रष्टाचार के कोई सबूत नहीं मिले हैं, इसलिए उन्हें जमानत पर रिहा किया जाता है.

कोर्ट अपने आदेश में साफ लिखा है अब तक आधिकारिक रूप से कफील खान के खिलाफ मेडिकल नेग्लिजेंस का कोई सबूत सामने नहीं आया है. इस को आधार बनाते हुए डॉ कफील ने अब अपनी नौकरी बहाल करने की मांग की है.

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उन्होंने कहा कि ”इन 9 महीनो ने फौलाद बना दिया है मुझे, अब डरूँगा नहीं लड़ूँगा इज्ज़त और प्यार से बुलाओगे तो फिर से उन मासूमो की ज़िन्दगीया बचाने मे तहेदिल से लग जाऊँगा. आमीन”

हादसे को लेकर डॉ कफील का कहना है कि वो त्रासदी ‘पूरी तरह से प्रशासनिक लापरवाही’ थी. उन्होंने कहा, “उस दिन मैंने जो कुछ किया, वो एक पिता, डॉक्टर और एक भारतीय होने के नाते किया. मेरा काम वहां बच्चों को बचाना था.’’

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