JNU Row Spreads To Aligarh Muslim University AMU

“विभिन्न शिक्षण संस्थानों में सरकार की जरूरत से ज्यादा पहुंच और विरोध एवं मतभेदों को दबाने की कथित कोशिशों की निंदा करते हुए आईआईटी बाॅम्बे के शिक्षकों ने आंदोलनरत जेएनयू छात्रों का समर्थन करते हुए कहा है कि सरकार को लोगों पर राष्ट्रवाद की परिभाषा नहीं थोपनी चाहिए।”

शिक्षकों ने एक संयुक्त बयान में कहा, भारतीय होना क्या है इस बारे में सरकार अपनी परिभाषा थोप नहीं सकती। वह राष्ट्रवाद का क्या अर्थ है इसपर जनादेश नहीं जारी कर सकती। इसके बजाय, सरकार को यह सुनिश्चित करना चाहिए कि किसी व्यक्ति के अपने देश के साथ संबंध के विभिन्न तरीकों को फलने-फूलने दिया जाए, खासतौर पर तब, जब वह सोचने के हावी तरीकों से विरोधाभासी हो सकते हों।

बयान में कहा गया, इस देश में उच्च शिक्षा के संस्थानों की स्वायत्तता को कमजोर करने वाली हाल की घटनाओं को लेकर हम बेहद चिंतित हैं। हमारा मानना है कि ये संस्थान आलोचनात्मक सोच और अभिव्यक्ति की जगह हैं। बौद्धिक एवं सामाजिक कार्यों में तकरार के मुद्दे सामने आ सकते हैं और इनसे लोकतांत्रिक एवं तर्कसंगत ढंग से निपटे जाने की जरूरत है।

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इस प्रतिष्ठित संस्थान के 42 शिक्षकों के हस्ताक्षरों वाले इस बयान में कहा गया, ये तरीके जिम्मेदार एवं जवाबदेह संस्थानिक प्रक्रियाओं के दायरे में होने चाहिए। हम कई संस्थानों में घटी हाल की घटनाओं में सरकार के जरूरत से ज्यादा दखल और दक्षिण पंथ की ओर से की जाने वाली विरोध एवं अलग मत को दबाने की कोशिशों की निंदा करते हैं। बयान में कहा गया कि यह हस्ताक्षर करने वाले शिक्षकों का रूख है न कि संस्थान का।

विभिन्न शैक्षणिक संस्थानों के छात्र एवं शिक्षक जेएनयू छात्र संघ के अध्यक्ष कन्हैया कुमार की रिहाई की मांग कर रहे हैं। कन्हैया को पिछले सप्ताह देशद्रोह के मामले में गिरफ्तार किया गया था। यह मामला विश्वविद्यालय परिसर में आयोजित उस समारोह से जुड़ा है, जिसका आयोजन संसद हमले के दोषी अफजल गुरू की फांसी के खिलाफ विरोध प्रदर्शन के लिए किया गया था। उस दौरान वहां कथित तौर पर भारत-विरोधी नारे लगाए गए थे। (outlookhindi)