नई दिल्ली | हाल ही में गौरक्षा के नाम पर हुई हिंसा में कई लोग मारे गए है. खासकर बीजेपी शासित राज्यों में हालात ज्यादा खराब है. यहाँ पर कथित गौरक्षको की गुंडागर्दी ज्यादा देखने को मिली है. यही वजह है की विपक्ष लगातार बीजेपी पर गौरक्षको को संरक्षण देने और हिंसा को प्रोत्साहित करने का आरोप लगाते आये है. फ़िलहाल इस मामले में सुप्रीम कोर्ट ने सख्ती दिखाते हुए सभी राज्यों सरकारों को हिंसा रोकने का आदेश दिया है.

6 सितम्बर को कांग्रेस नेता तहसीन पूनावाला और कुछ अन्य लोगो को याचिका पर सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने राज्य सरकारों को निर्देश दिया था की वो ऐसी घटनाओं को तत्काल रोके और सभी जिलो में एक नोडल ऑफिसर की नियुक्ति करे. इसके अलावा एक हफ्ते के अन्दर कार्यबल गठित कर स्टेटस रिपोर्ट अदालत में दाखिल करने का आदेश दिया था. इनमे गुजरात, राजस्थान, कर्नाटक और उत्तर प्रदेश ने अदालत में स्टेटस रिपोर्ट दाखिल कर दी.

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शुक्रवार को इसी मामले में सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने बाकि बचे सभी राज्यों से स्टेटस रिपोर्ट जल्द दाखिला करने को कहा है. इसके अलावा अदालत ने राज्य सरकारों से उन सभी पीडितो को मुआवजा देने का भी आदेश दिया है जो गौहिंसा के शिकार हुए है. चीफ जस्टिस दीपक मिश्रा ने अपने आदेश में कहा की गौरक्षा के नाम पर हो रही हिंसा के शिकार सभी पीडितो को मुआवजा दिया जाए.

बताते चले की पिछले कुछ महीनो में देश के कई राज्यों में गौरक्षा के नाम पर कई लोगो की बेरहमी से पिटाई की गयी है. इनमे से कुछ पीडितो को तो अपनी जान से भी हाथ धोना पड़ा है. राजस्थान के अलवर में पहलु खान की कथित गौरक्षको ने बड़ी बेरहमी से पिटाई की. गौरक्षको का आरोप था की पहलु खान गौतास्करी के लिए गाय ट्रक में लाधकर ले जा रहा था. जबकि पहलु के परिजनों का कहना है की वो दूध की डेरी चलाता है इसलिए जयपुर से गाय खरीदकर ला रहा था.

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