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बिहार में समस्तीपुर ज़िले के रोसड़ा में रामनवमी के मौके पर जब दंगाई राम के नाम पर मस्जिदों और मदरसों पर हमले कर रहे थे. उस वक्त एक सच्चा राम भक्त भी मौजूद था. जिसने दंगाइयों से मदरसों के छात्रों की जान बचाई थी.

शहर के जाने-माने डॉक्टर अशोक मिश्रा जिनका घर और क्लिनिक मदरसे के बगल में है. 27 मार्च को दिन में करीब 12 बजे दंगाइयों ने मदरसे पर हमला बोला था. उस वक्त अशोक मिश्रा ने 20 बच्चों के साथ मदरसे के दो शिक्षकों को भी अपने यहां शरण दी थी.

जब दंगाइयों ने मदरसे पर हमला किया तो अशोक मिश्रा मरीज़ों को देख रहे थे. तभी उनके किराएदार के एक परिवार की महिला ने कहा कि मदरसे पर दंगाइयों ने हमला कर दिया है और बच्चे घर के पीछे खड़े हैं.

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बीबीसी के अनुसार, अशोक मिश्रा ने बिना देरी किए सारे बच्चों को अपने घर में छुपा लिया. बच्चों के साथ मदरसे के संचालक मौलाना नज़ीर अहमद नदवी भी शामिल थे.

अशोक मिश्रा पूरे वाकये के बारे में बताते हैं, ”मैंने उन बच्चों से कहा कि तुम लोग डरो मत हम सब तुम्हारे साथ हैं. उनके साथ दो टीचर भी थे. सबसे कहा कि आप लोग बिल्कुल रिलैक्स रहिए. वो लोग भी मेरे कहने के मुताबिक़ मान गए. सभी बुरी तरह से डरे हुए थे. हमने बच्चों को आश्वस्त किया कि उन्हें कोई कुछ नहीं कर सकता है.”

मिश्रा कहते हैं, ”माहौल ठीक हुआ तो मैंने कहा कि पुलिस जो पूछे बिल्कुल सच-सच बता देना. किसी से डरने की ज़रूरत नहीं है. मैंने बच्चों से कहा कि तुम लोग सही बात बताओगे तो सारी चीज़ें समझ में आएंगी. ऐसे आश्वस्त करना तो मेरा फ़र्ज था. मैं उनकी हर हाल में सुरक्षा करता. ये नहीं भी आते तब भी मैं उन्हें घर लाता.”

मदरसे के संचालक मौलाना नज़ीर अहमद नदवी कहते हैं कि शहर को अशोक मिश्रा जैसे लोगों की ज़्यादा ज़रूरत है ताकि आग लगने पर पानी लेकर सामने आने की हिम्मत रख सके.

नदवी से मैंने अशोक मिश्रा के घर का रास्ता पूछा तो वो बताने से डर रहे थे कि कहीं मिश्रा जी को दिक़्क़त न हो जाए. जब अशोक मिश्रा के घर पहुंचा तो उनके मन में कोई डर नहीं था कि दंगाई जान जाएंगे कि उन्होंने मुस्लिम बच्चों को बचाया था.

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