ajmer sharif

अजमेर. सुल्तान-ए-हिंद हजरत ख्वाजा मोइनुद्दीन हसन चिश्ती (रह.) के 806वें उर्स का बड़े कुल की रस्म के साथ बुधवार को समापन हो गया. आशिकान ए ख्वाजा ने कुल की रस्म अदा कर मुल्क व सूबे में अमन व खुशहाली की दुआ की. इसी के साथ उर्स का झंडा भी उतार लिया गया.

बड़े कुल की रस्म में देश विदेश प्रदेश के विभिन्न हिस्सों से आए जायरीनों ने भाग लेकर ख्वाजा साहब के प्रति जहां अपनी आस्था व्यक्त की वहीं धार्मिक रस्म की अदाई करते हुए दरगाह परिसर को पानी से धोया. बड़े कुल की रस्म सुबह 8 बजे दरगाह में खुद्दाम ए ख्वाजा ने अदा कराई. इस मौके पर दरगाह जायरीन ए ख्वाजा से भरी थी. बड़ी संख्या में महिला अकीतमंद और बच्चे भी मौजूद थे.

अंजुमन सैयदजादगान के सचिव एवं उर्स संयोजक सैयद वाहिद हुसैन अंगारा ने बताया कि सुबह से ही दरगाह की दीवारों को गुलाब जल एवं केवड़े से धोना शुरू किया गया. आस्ताने पर यह रस्म खुद्दाम-ए-ख्वाजा ने निभाई. यह क्रम धीरे धीरे बढ़ते हुए आस्ताने से जन्नती दरवाजा, पायंती दरवाजा, आहता-ए-नूर व बेगमीदलान तक पहुंच गया जहां जायरीनों ने धुलाई कर उसका पानी तवर्रूक के रूप में बोतलों में एकत्रित किया. उसके बाद पूरी दरगाह परिसर को पानी से धोया गया. कुल की फातिहा के बाद उर्स का विधिवत समापन हो गया.

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अजमेर के ख्वाजा गरीब नवाज के उर्स में पहुंची पाकिस्तान सरकार की चादर

इसी बीच मंगलवार को पाकिस्तान की और से सुल्तान-ए-हिंद के दरबार में चादर पेश की गई. पाकिस्तान उच्च आयुक्त सोहेल मोहम्मद ने यह चादर पेश की. इस वक्त पर दोनों मुल्कों के बीच संबंधों की बेहतरी की दुआएं मांगी गईं. पाकिस्तान उच्च आयुक्त सोहेल सुबह 11 बजे चादर लेकर अजमेर पहुंचे. ख्वाजा गरीब नवाज के उर्स में चादर पेश करने के बाद उन्होंने कहा कि उतार चढ़ाव आते रहते हैं लेकिन मोहब्बत का सिलसिला कयामत तक जारी रहे.

बता दें कि पाकिस्तानी दल को वीजा नहीं मिलने से अब तक चादर पेश नहीं हो सकी थी. इसके बाद मंगलवार को पाकिस्तान सरकार अफसर यह चादर लेकर पहुंचे हैं. चादर के साथ भारत-पाक के अच्छे रिश्तों की दुआएं की गईं.