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लखनऊ । देश भले ही कितनी ही आर्थिक तरक़्क़ी कर ले लेकिन आज भी देश का अन्नदाता अपने हक़ों के लिए सड़कों पर उतरने के लिए मजबूर है। फ़सलो का सही दाम न मिलने की वजह से किसान क़र्ज़ में डूब रहे है, खदख़ुशी कर रहे है। सरकारें बनती है फिर चली जाती है, फिर नई सरकारें बनती है लेकिन किसान की हालत जस की तस बनी रहती है। उनकी फ़िक्र करने वाला शायद कोई नही है।

उत्तर प्रदेश और केंद्र की सत्ता पर आसीन होने वाली भाजपा ने चुनाव प्रचार के समय बड़े बड़े वादे किए। लेकिन सत्ता में आने के बाद सब वादे केवल जुमले ही साबित हुए। इसकी एक बानगी उत्तर प्रदेश में तब देखने को मिली आलू किसान, आलू के सही दाम न मिलने की वजह से अपनी फ़सल को सड़क पर फेंकते दिखे। इसके बाद भी जब सरकार ने उनकी नही सुनी तो उन्होंने मुख्यमंत्री आवास के बाहर आलू फेंककर अपना विरोध जताया।

7 जनवरी को उस समय प्रशासन में हड़कम्प मच गया जब मुख्यमंत्री आवास, राज भवन और विधानसभा के सामने आलू ही आलू बिखरे पड़े थे। कहा गया कि किसानो ने विरोध जताने के लिए आलू सड़क पर फेंक दिए। इस मामले में लापरवाही बरतने के आरोप में 5 पुलिस कर्मियों को ससपेंड कर दिया गया। अब इस मामले में पुलिस ने दो लोगों को गिरफ़्तार किया गया है।

शनिवार को पुलिस ने दो लोगों को गिरफ़्तार किया। इनमे से एक कन्नौज के सपा नेता का क़रीबी अंकित सिंह है तो दूसरा एक ड्राइवर संतोष पाल है। फ़िलहाल दोनो को हिरासत में लेकर पूछताछ की जा रही है। पुलिस का कहना है की मामले की जाँच करने पर पता चला की 7 जनवरी को कोई लोडर सड़क पर आलू गिराते हुए चला गया। यह लोडर संतोष पाल चला रहा था। इसके बाद दूसरे आरोपी को भी गिरफ़्तार कर लिया गया।

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