Friday, September 17, 2021

 

 

 

बीएचयू की परीक्षा में तीन तलाक़ और हलाला को बताया गया सामाजिक बुराई, छात्रों ने जताया विरोध

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वाराणसी । हाल ही में छात्राओं पर लाठीचार्ज को लेकर विवादों में घिरी बनारस हिंदू यूनिवर्सिटी एक बार फिर चर्चा में है। इस बार चर्चा की वजह, परीक्षा में पूछे गए कुछ सवाल बने। दरअसल बीएचयू की इतिहास की परीक्षा में इस्लाम को लेकर कुछ सवाल किए गए है। इनमे तीन तलाक़ और हलाला को सामाजिक बुराई क़रार दिया गया है। इसके अलावा ख़िलजी को लेकर भी सवाल किए गए है।

इस तरह के सवाल सामने आने के बाद यूनिवर्सिटी के छात्रों में नाराज़गी है। उनका आरोप है की यूनिवर्सिटी प्रशासन हमारे ऊपर अपनी विचारधारा थोपने की कोशिश कर रहा है। हालाँकि यूनिवर्सिटी के इतिहास के प्रफ़ेसर ने इन आरोपो का खंडन किया है। उनका कहना है की हम वो ही पढ़ा रहे है जो असली इतिहास है। उधर कुछ मुस्लिम संगठनो ने इस तरह के सवालों पर अपनी अप्पत्ति जतायी है।

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार 22 नवम्बर को हिस्ट्री डेपर्टमेंट के एमए थर्ड सेमिस्टर की परीक्षा थी। ‘सोसाइटी ऑफ कल्चर एंड रिलीजन इन मेडिवल इंडिया’ नाम के विषय की इस परीक्षा में इस्लाम को लेकर कुछ सवाल किए गए। इनमे कुछ इस तरह के सवाल पूछे गए थे-:

1. जिल्ले अल्लाह क्या है?

2. इस्लाम में हलाला क्या है?

3. अलाउद्दीन खिलजी द्वारा नियत की गई गेहूं की क्या कीमत थी?

4. स्वयं को सिकंदर-ए-सानी कौन कहता था?

5. शर्फ कायिनी कौन था?

6. इस्लाम में तीन तलाक एवं हलाला एक सामाजिक बुराई है. इसकी व्याख्या कीजिए.

इस तरह के सवाल पूछे जाने पर कुछ छात्रों ने इसका विरोध किया। उन्होंने यूनिवर्सिटी प्रशासन पर अपनी विचारधारा थोपने का आरोप लगाया। हालाँकि हिस्ट्री के असिस्टेंट प्रोफेसर राजीव श्रीवास्तव ने कहा, ‘अगर स्टूडेंट्स को सिखाया ना जाए और ऐसी चीजों के बारे में पूछा जाए तो वे इस बारे में कैसे बता पाएंगे? जब वे मेडिवल (मध्यकालीन) हिस्ट्री पढ़ते हैं तो ये चीजें अपने आप में एक हिस्सा बन जाती हैं। इतिहास का रूप बिगड़ रहा है इसलिए हमें उन्हें ये चीजें पढ़ानी होंगी ताकि वो असली इतिहास जान पाएं।’

राजीव श्रीवास्तव ने आगे कहा,’ अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी (एएमयू) और जवाहरलाल नेहरू यूनिवर्सिटी (जेएनयू) बाल विवाह और सती प्रथा पर सवाल क्यों पूछते हैं? इस्लाम में भी कमियां हैं, जिन्हें बताना चाहिए। जब हमें इस्लाम का इतिहास पढ़ाना होगा तो हमें इस तरह की चीजों को भी बताना होगा। संजय लीला भंसाली जैसे लोग लोगों को इतिहास नहीं सिखाएंगे।’

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