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सोहराबुद्दीन शेख के भाई रुबाबुद्दीन ने स्पेशल CBI कोर्ट को बताया कि तुलसीराम प्रजापति ने उसे गुजरात पुलिस द्वारा शेख के कथित अपहरण और बाद में नवंबर 2005 में फर्जी मुठभेड़ में उसकी मौ’त के बारे में बताया था।

रुबाबुद्दीन ने अदालत को बताया, ‘‘सोहराबुद्दीन के साथी तुलसी प्रजापति ने मुझे बताया था कि जब मेरा भाई मारा गया तो वह मौजूद था। जब मैंने उससे पूछा कि उसे क्यों नहीं मारा गया तो उसने बताया कि वह हिंदू है, उसे सोहराबुद्दीन के साथ आतंकी नहीं बताया जा सकता था, जो मुसलमान था।”

उसने कहा कि एक रिश्तेदार ने 26 नवंबर, 2005 को उसे बताया कि सोहराबुद्दीन मारा गया है और परिवार को अहमदाबाद सिविल अस्पताल में उसकी लाश पहचानकर लानी होगी। उसने कहा कि हम अहमदाबाद गये। हमने आतंकवाद रोधी दस्ते (एटीएस) के दफ्तर में जाकर एक अधिकारी से पूछा कि मेरा भाई क्यों मारा गया और कौसर बी कहां है तो कोई जवाब नहीं मिला।

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रुबाबुद्दीन के मुताबिक उसने गुजरात पुलिस को भी पत्र लिखा था लेकिन कोई जवाब नहीं मिला। उसने बताया कि उच्चतम न्यायालय में गुजरात और राजस्थान पुलिस के अधिकारियों पर कार्रवाई की मांग वाली याचिका दाखिल करने और कौसर बी का पता पूछने के लिए बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका दाखिल करने के बाद जवाब में गुजरात सरकार ने उच्चतम न्यायालय को सूचित किया कि वह भी मारी गयी।

इससे पहले गवाह आज़म ख़ान ने दावा किया है, “गुजरात के पूर्व आईपीएस अधिकारी डीजी वंज़ारा ने सोहराबुद्दीन को बीजेपी नेता और गुजरात के पूर्व मंत्री हरेन पांड्या की हत्या की सुपारी दी थी। आज़म ख़ान सोहराबुद्दीन और तुलसीराम प्रजापति का सहयोगी था. उसके मुताबिक सोहराबुद्दीन ने ये बात उसे ख़ुद बताई थी।

बता दें कि 2005 में सोहराबुद्दीन और 2006 में तुलसीराम प्रजापति की एनकाउंटर में मौत हो गई थी। इस मामले में गुजरात और राजस्थान पुलिस पर फर्ज़ी मुठभेड़ के आरोप लगे और सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद गुजरात सीआईडी क्राइम ब्रांच ने मामले की जांच की और पुलिस अधिकारियों के ख़िलाफ़ मामला दर्ज किया।

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