2005 में सोहराबुद्दीन एनकाउंटर केस में विशेष सीबीआई कोर्ट ने मामले में आरोपी डीजी वंजारा और दिनेश एमएन को बरी कर दिया है. दोनों को सबूतों के अभाव में दोनों को बरी किया गया है. इस केस में बीजेपी के अध्यक्ष अमित शाह समेत कई नेताओं को पहले ही बरी किया जा चुका है.

डीजी वंजारा 1987 बैच के गुजरात कैडर के आईपीएस अधिकारी हैं. सीबीआई की जांच के अनुसार, एनकाउंटर स्पेशलिस्ट के नाम से फेमस वंजारा ने कई एनकाउंटर फर्जी किये थे. सोहराबुद्दीन एनकाउंटर मामले में वंजारा को 24 अप्रैल, 2007 को गिरफ्तार किया गया था और वह 8 साल इस मामले में जेल में रहे.

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हालांकि सितंबर, 2014 में मुंबई की एक अदालत ने वंजारा को जमानत दे दी थी. लेकिन उन्हें गुजरात में एंट्री की इजाजत नहीं दी गई थी. 9 सालों के लंबे अंतराल के बाद गुजरात लौटे थे. सोहराबुद्दीन शेख एनकाउंटर मामले में सीबीआई ने चार्जशीट में बताया था कि ये एक एनकाउंटर नहीं बल्कि सोची-समझी साजिश के तहत कॉन्ट्रैक्ट मर्डर था. वहीं, गुजरात पुलिस ने दावा किया था कि सोहराबुद्दीन के लश्कर से संबंध थे.

सोहराबुद्दीन शेख और उनकी पत्नी कौसर बी को गुजरात एटीएस ने कथित तौर पर तब अगवा किया जब वो हैदराबाद से महाराष्ट्र के सांगली जा रहे थे. नवंबर 2015 में गांधीनगर में सोहराबुद्दीन शेख का एनकाउंर हुआ था. इनमें सोहराबुद्दीन के अलावा उसकी पत्नी कौसर बी, तुलसीराम प्रजापति, सादिक जमाल, इशरत जहां और उसके साथ मारे गए तीन अन्य लोग शामिल हैं.

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