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सोहराबुद्दीन शेख फर्जी मुठभेड़ मामले में सीबीआई पर सवाल उठाने वाली बॉम्बे हाईकोर्ट की जज को हटा दिया गया. ध्यान रहे जस्टिस रेवती मोहिते डेरे इस मामले से जुड़ी याचिकाओं पर सुनवाई कर रही थीं.

बॉम्बे हाईकोर्ट की वेबसाइट पर प्रकाशित नोटिस के अनुसार, अब रेवती मोहिते डेरे आपराधिक समीक्षा आवेदनों की सुनवाई नहीं करेंगी और अब अग्रिम जमानत अर्जी के ही मामले देखेंगी. सोहराबुद्दीन का मामला अब जस्टिस एनडब्ल्यू सांबरे की नई एकल पीठ के पास रहेगा. वे ही अापराधिक समीक्षा आवेदनों को सुनेंगे.

ध्यान रहे जस्टिस रेवती मोहिते डेरे ने कहा था कि ‘अभियोग लगाने वाली एजेंसी का यह प्रथम कर्तव्य है कि वह अदालत के समक्ष सभी साक्ष्यों को रखे. लेकिन इस मामले में अदालत द्वारा कई बार पूछने पर भी सीबीआई ने केवल उन्हीं दो अधिकारियों की भूमिका के बारे में बहस की जिन्हें आरोपमुक्त करने को उसने चुनौती दी है.’

उन्होंने कहा था, ‘अभियोजन पक्ष के पूरे मामले को लेकर अभी भी अस्पष्टता है क्योंकि मुझे सीबीआई की ओर से पर्याप्त मदद नहीं मिल रही.’ अदालत ने अब सीबीआई को निर्देश दिया है कि वह दंड प्रक्रिया संहिता की धारा 164 के तहत दर्ज किए गए सभी गवाहों के बयानों की जानकारी पेश करे.

इस बारे में रुबाबुद्दीन के वकील गौतम तिवारी का कहना है कि वे एक्टिंग चीफ जस्टिस वीके ताहिलरमानी से मांग करेंगे कि मामले को जस्टिस डेरे की कोर्ट में ही चलने दिया जाए. वे काफी सुनवाई कर चुकी हैं. तो वहीं, बरी हुए आईपीएस अफसरों का पक्ष रख रहे वकील महेश जेठमलानी का कहना है कि जजों की जिम्मेदारी में रोजाना बदलाव होता है. इसके ज्यादा कुछ अर्थ निकालने की जरूरत नहीं है.

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