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आधार नंबर की बिक्री को लेकर खबर छापने वाले अखबार और पत्रकार के खिलाफ एफआईआर मोदी सरकार की और से एफआईआर की दुनिया भर में तीखी आलोचना हो रही है.

ध्यान रहे  ‘द ट्रिब्‍यून’ ने अपनी रिपोर्ट में दावा किया था कि महज 500 रुपये में देश के करोड़ों लोगों का आधार नंबर हासिल किया जा सकता है. रिपोर्ट में कहा गया था कि रिपोर्टर ने इस गिरोह को चलाने वाले एक एजेंट से संपर्क किया और उसे पेटीएम के जरिये 500 रुपये का भुगतान किया था. दस मिनट के बाद एक शख्स ने रिपोर्टर को एक लॉगइन आईडी और पासवर्ड दिया. इसके जरिये पोर्टल पर किसी भी आधार नंबर की पूरी जानकारी ली जा सकती थी. इनमें से नाम, पता, पोस्टल कोड, फोटो, फोन नंबर और ई-मेल शामिल हैं.

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रिपोर्ट में ये भी बताया गया कि जब उस एजेंट को 300 रुपये और दिए गए तो उसने ऐसा सॉफ्टवेयर दिया, जिसके जरिये किसी भी व्‍यक्ति के आधार को प्रिंट किया जा सकता था. इस मामले में यूआईडीएआई ने ‘द ट्रिब्‍यून’ और रिपोर्टर रचना खैरा के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराई है.

अमेरिका की खुफिया जानकारी लीक करने के आरोपी एडवर्ड स्नोडेन ने मंगलवार को इस मामले में पत्रकार का पक्ष लेते हुए यूआईडीएआई पर जमकर भड़ास निकाली. उन्होंने रिपोर्टर रचना खैरा को इस सबंध में अवार्ड तक देने की बात कही.

उन्होंने ट्वीट कर कहा, ‘जिस पत्रकार ने आधार की कमियों को उजागर किया है उसे अवॉर्ड मिलना चाहिए. उस पर जांच बिठाने की जरूरत नहीं है. अगर सरकार वाकई इसके लिए चिंतित है तो कार्ड के जरिए निजी सूचनाएं हैक न हों और करोड़ों भारतीयों की निजता पर आघात न हो, इसके लिए काम करना चाहिए. निजता के हनन के जो जिम्मेदार में उन्हें गिरफ्तार किया जाना चाहिए और जिम्मेदार संस्था का नाम UIDAI है.’

कानून मंत्री रविशंकर प्रसाद ने भी इस मुद्दे पर सफाई देते हुए कहा था कि सरकार प्रेस की आजादी को लेकर उतनी ही प्रतिबद्ध है, जितनी करोड़ों भारतीयों की आधार सुरक्षा को लेकर. ये एफआईआर अज्ञात के खिलाफ दर्ज कराई गई है. मैंने यूआईडीएआई से ट्रिब्यून और उनकी पत्रकार से इस मामले की तह में जाने के लिए सहयोग लेने की बात कही है.