लखनऊ | उत्तर प्रदेश में योगी आदित्यनाथ के मुख्यमंत्री बनने के बाद एक कारोबार पर संकट के बदल मंडराए हुए है. बीजेपी ने चुनाव प्रचार के दौरान वादा किया था की सरकार बनने के 24 घंटे के अन्दर इस कारोबार को बंद करा दिया जाएगा. अब चूँकि प्रदेश में बीजेपी की सरकार बन चुकी है और मुख्यमंत्री की शपथ भी एक ऐसे शख्स ने ली है जो हमेशा से इस कारोबार के खिलाफ मुखर रहा है.

हम बात कर रहे है बूचड़खानों की. चुनाव प्रचार के दौरान बीजेपी अध्यक्ष अमित शाह से लेकर खुद योगी आदित्यनाथ ने कहा था की सरकार बनने के 24 घंटे के अन्दर अध्यादेश पारित कर प्रदेश के सभी बूचड़खानों को बंद करा दिया जाएगा. यह बात बीजेपी ने अपने संकल्प पत्र में भी लिखी हुई है. इसलिए बूचड़खाने चलाने वाले मालिको में मन में दहशत का माहौल है.

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अगर योगी ऐसा कोई फरमान सुनाते है तो इससे न केवल प्रदेश के राजस्व पर असर पड़ेगा बल्कि हजारो लोगो के सामने रोजी रोटी का संकट भी आ जायेगा. एक अनुमान के मुताबित बूचड़खानों की वजह से प्रदेश को करीब 11 हजार 350 करोड़ रूपए का राजस्व प्राप्त होता है. फ़िलहाल उत्तर प्रदेश में 356 बूचड़खाने है जिनमे से केवल 40 बूचड़खाने वैध है. हालाँकि एनजीटी पहले ही सभी अवैध बूचड़खाने बंद कराने का आदेश दे चूका है.

उसी आदेश का पालन करते हुए इलाहबाद में दो दिन के अन्दर दो बूचड़खानों को बंद भी कराया जा चूका है. उधर वैध बूचड़खाना चलाने वाले एक शख्स ने बताया की उनके यहाँ करीब 1500 लोग काम करते है. इसके अलावा हमारे पास इन बूचड़खानों को चलाने का लाइसेंस है. अगर सरकार इनको बंद करने का कोई भी आदेश जारी करती है तो हमारे पास सुप्रीम कोर्ट जाने का रास्ता बचा हुआ है.

कुछ ऐसे भी मालिक है जिनका कहना है की हम एनजीटी के नियमो के अनुसार प्रदूषण नियंत्रित करने के सभी मानक पूरे कर रहे है. इसके अलावा बूचड़खानों में अधुनिक मशीन लगाईं गयी है जिनमे करोडो रूपए का निवेश किया गया है. बूचड़खानों की वजह से भेंस और गायो की संख्या में कमी होने के सवाल पर उन्होंने कहा की हम किसी के साथ जबरदस्ती नही करते. जिनके यहाँ भेंसो का कोई काम नही बचता वो हमें खुद इन भेंसो को बेचते है. और आंकड़े कहते है की 2007 के मुकाबले 2012 में गाय और भेंसो की संख्या में वृद्धि हुई है.

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