भारत ने रविवार सुबह स्क्रैमजेट इंजन का सफल परीक्षण करते हुए इतिहास रच दिया. रविवार को आंध्र प्रदेश के श्रीहरिकोटा के सतीश धवन अनुसंधान केंद्र से सुबह छह बजे तीन टन वजन के RH-560 सुपरसोनिक कम्‍बशन रैमजेट ने उड़ान भरी. भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि यह मिशन सफल रहा.

इसरो के वैज्ञानिकों ने बताया कि यह इंजन रियूजेबल लॉन्‍च व्‍हीकल को हायरपासोनिक स्‍पीड पर उपयोग करने में मदद देगा. इसरो की इस सफलता से प्रक्षेपण पर आने वाले खर्च में 10 गुना तक कमी आ सकती है.

स्क्रैमजेट इंजन के सफल परीक्षण से भारत, अमेरिका और ऑस्ट्रेलिया के बाद दुनिया का तीसरा देश है जिसके पास यह टेक्नोलॉजी है. जापान, चीन, रूस और यूरोपीय संघ सुपरसोनिक कॉमबस्‍टर तकनीक के टेस्टिंग फेज में हैं. वहीं नासा ने 2004 में स्‍क्रेमजेट इंजन का प्रदर्शन किया था. इसरो ने भी साल 2006 में स्‍क्रेमजेट का ग्राउंड टेस्‍ट किया था.

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