2002 में गुजरात दंगों के दौरान नरोदा गाम में अल्पसंखयक मुस्लिम समुदाय के जनसंहार से जुड़े मामले में सुप्रीम कोर्ट की SIT ने मुख्य आरोपी एवं राज्य की पूर्व मंत्री माया कोडनानी के बचाव में भाजपा अध्यक्ष अमित शाह को विश्वसनीय मानने से इंकार कर दिया है। साथ ही इस पर विचार करने से भी मना कर दिया।

विशेष सरकारी वकील गौरांग व्यास ने कल न्यायाधीश एम के दवे को बताया कि कोडनानी के बचाव में शाह के बयान का कोई मतलब नहीं है क्योंकि यह काफी समय बीत जाने के बाद दिया गया। व्यास ने यहां अदालत को बताया, ‘‘शाह का बयान विश्वसनीय नहीं है क्योंकि किसी अन्य आरोपी ने सोला सिविल अस्पताल में कोडनानी की मौजूदगी का उल्लेख नहीं किया।’’मामले में अगली सुनवाई शुक्रवार को होगी।

सरकारी वकील गौरांग व्यास ने कहा कि अमित शाह का बयान इस केस के मुख्य आरोपी पूर्व बीजेपी मंत्री माया कोडनानी को मदद से पहुंचाने के मकसद से दिया गया है। गौरांग व्यास ने कहा, “अमित शाह ने अपना बयान घटना के 15 साल बाद रिकॉर्ड कराया, जो अब प्रासंगिक नहीं है, इसका मकसद माया कोडनानी को मदद पहुंचाना है, क्योंकि तब दोनों ही विधायक थे।”

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बता दें कि अपने बचाव में माया कोडनानी ने कहा था कि जब 28 फरवरी 2002 को गुजरात के नरोदा गाम में दंगे भड़के, तब वह और अमित शाह हॉस्पिटल में थे। जबकि शाह ने कहा था कि उन्होंने कोडनानी को सबसे पहले विधानसभा में सुबह 8.30 बजे देखा था. विधानसभा से वह सोला सिविल हॉस्पिटल के लिए निकल गए। अपने बयान में शाह ने कहा कि इस घटना के विरुद्ध खूब नारे लग रहे थे. इस वजह से पुलिस की एक टीम ने मुझे और मायाबेन को सुरक्षा उपलब्ध करवायी।

व्यास ने तर्क दिया कि अमित शाह का सोला सिविल हॉस्पिटल में होना संदिग्ध है जबकि आरोपी बाबू बजरंगी और जयदीप पटेल ने शाह की मौजूदगी को रेखांकित किया था। सोला सिविल हॉस्पिटल वह जगह है जहां कारसेवकों के शव गोधरा से लाए गए थे। व्यास का कहना है कि किसी और आरोपी ने कोडनानी के हॉस्पिटल में होने का उल्लेख नहीं किया।

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