Tuesday, August 3, 2021

 

 

 

एसआईटी का दावा: लॉ छात्रा ने चिन्मयानंद से रंगदारी मांगने का जुर्म कबूला

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शाहजहांपुर. चिन्मयानंद से रंगदारी मांगने के आरोप में पीड़ित छात्रा की गिरफ्तारी के मामले एडीजे फर्स्ट कोर्ट ने बुधवार को पीड़िता की जमानत अर्जी खारिज कर दी है।पीड़िता की गिरफ्तारी के बाद छात्रा के वकील ने कोर्ट में जमानत के लिए अर्जी दाखिल की थी।

दूसरी और एसआईटी ने दावा किया कि छात्रा ने खुद चिन्मयानंद से 5 करोड़ रु. रंगदारी मांगने की बात स्वीकार की है। एसआईटी टीम में शामिल आईपीएस भारती सिंह ने कहा कि चिन्मयानंद से 5 करोड़ रुपए की रंगदारी मांगने के प्रकरण में छात्रा के खिलाफ पुख्ता सबूत है। इन सबूतों की फोरेंसिक लैब से जांच कराई जा चुकी है। जिस वीडियो में पीड़िता और उसके दोस्त रंगदारी मांगने की बातचीत कर रहे हैं, उसकी पुष्टि खुद पीड़िता ने कर दी थी। 5 करोड़ की रंगदारी मांगने की बात भी स्वीकार कर ली थी। जांच अभी जारी है और इस दौरान अगर कोई नया नाम सामने आया तो उसके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।

भारती सिंह ने बताया कि इससे पहले सचिन विक्रम और संजय को भी पहचाना गया। जिस गाड़ी में रंगदारी की बात की जा रही थी उसे भी लड़की ने पहचाना।लड़की ने खुद कबूल किया कि उसने योजना बनाकर तीनो लड़कों के साथ स्वामी चिन्मयानंद से रंगदारी मांगी थी। सभी साक्ष्यों को इकट्ठा किया गया और उसके बाद लड़की को गिरफ्तार किया गया है। जिस लड़के ने गाड़ी मे बैठकर विडियो बनाया था, गाड़ी उसी की है। उसका नाम अनूप है। उसका इसमें कोई रोल नहीं है, वह सिर्फ ड्राइवर है।

एसआईटी की एसपी ने कहा कि चिन्मयानंद की रिमांड के बारे में अभी आगे सोचेंगे। लड़की को 14 दिन की रिमांड पर भेजा है। अस्पताल की प्रवक्ता के खिलाफ भी जांच हो रही है। उन्होंने एसआईटी का गलत नाम लिया था कि लड़की को 385, 201, 506, 34 व 67 आईटी एक्ट में जेल भेजा गया है।

उन्होंने कहा कि इस केस की विवेचना अभी चल ही रही है. किसी भी न्यायालय ने लड़की की गिरफ्तारी पर कोई रोक नहीं लगाई थी, तभी उसको गिरफ्तार किया गया है। जो गवाह और साक्ष्य मिले थे उसी के आधार पर चिन्मयानंद पर 376 सी धारा लगाई गई है।

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