Tuesday, August 3, 2021

 

 

 

दिल्ली हिंसा में सिखों ने की मदद तो बदले में सुलझा ‘गुरुद्वारा-मस्जिद’ विवाद

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राजधानी दिल्ली में भड़की हिंसा के दौरान सिख समुदाय की और से की गई मदद के बाद दोनों समुदाय एक दूसरे के नजदीक आ रहे है। उत्तर प्रदेश के सहारनपुर में इस मदद को ध्यान में रखते हुए मुस्लिम समुदाय ने बरसो पुराने ‘गुरुद्वारा-मस्जिद’ विवाद को आपस में मिलकर सुलझा लिया।

बता दें कि 2014 में गुरद्वारा और मस्जिद की जमीन के विवाद को लेकर दोनों समुदायों में दंगा हुआ था और 3 लोगो की मौत हो गई थी। दर्जनों घायल हुए थे और सैकड़ों दुकानें जला दी गई थीं। ऐसे में सहारनपुर के कुतुबशेर इलाके में गुरद्वारा गुरु सिंह सभा ने पिछले दिनों एक वैकल्पिक जमीन की पेशकश दिए जाने के बाद मुस्लिम समुदाय ने अपना दावा छोड़ दिया था। इसके बाद गुरुद्वारा मैनेजमेंट ने भूमि खरीदने व इसकी रजिस्ट्री पर 60 लाख रुपये खर्च किए। जिसे भी मस्लिम समुदाय ने वापस कर दिये।

शिरोमणि अकाली दल के अध्यक्ष और पंजाब के पूर्व उपमुख्यमंत्री सरदार सुखबीर सिंह बादल ने मंगलवार को दिल्ली में सहारनपुर मस्जिद कमेटी को सम्मानित किया, जिसने उत्तर-पूर्वी दिल्ली में सांप्रदायिक हिंसा के दौरान सिखों द्वारा मुस्लिम समुदाय की सहायता के लिए आभार प्रकट करते हुए एक मस्जिद के निर्माण के लिए सिखों के साथ विवाद वाले एक वैकल्पिक जमीन के टुकड़े पर अपना दावा छोड़ दिया है।

सुखबीर बादल ने कहा, “सहारनपुर के सिखों तथा मुसलमानों में 10 साल पुराना एक विवाद उस समय शुरू हुआ था जब शहर की गुरुद्वारा कमेटी ने गुरुद्वारा कॉम्पलेक्स को बड़ा करने के लिए भूमि का एक टुकड़ा खरीदा था। दोनों समुदायों के बीच हुई हिंसा के बाद यह झगड़ा सुप्रीम कोर्ट में पहुंच गया था, जहां गुरुद्वारा मैनेजमेंट द्वारा एक वैकल्पिक जमीन की पेशकश दिए जाने के बाद मुस्लिम समुदाय ने अपना दावा छोड़ दिया था। इसके बाद गुरुद्वारा मैनेजमेंट द्वारा भूमि खरीदने तथा इसकी रजिस्ट्री करवाने के लिए 60 लाख रुपये खर्च किए गए थे।”

इस समझौते के बारे जानकारी देते हुए उत्तर प्रदेश अकाली दल के प्रभारी प्रोफेसर प्रेम सिंह चंदूमाजरा ने कहा कि वह इस संबंध में पिछले एक साल से बैठकें करते आ रहे थे तथा इस 10 साल पुराने झगड़े के शांतिपूर्ण समाधान से दोनों समुदायों के बीच समझौते की ऐतिहासिक उदाहरण है।

उन्होंने कहा कि मस्जिद कमेटी का प्रतिनिधित्व करने वाले मुहर्रम अली पप्पू ने आज 60 लाख का चेक भी वापस कर दिया है तथा वचन दिया है कि सहारनपुर का मुस्लिम समुदाय नए गुरुद्वारा कांप्लेक्स के निर्माण में कार सेवा करेगा। बादल ने कहा, “सिखों तथा मुस्लिमों में बिना शर्त के हुए इस समझौते ने एक उदाहरण स्थापित किया है कि किस तरह दो समुदायों के विवाद को सहयोग तथा आपसी प्यार से मिटाया जा सकता है।”

बता दें कि जून 2014 में सहारनपुर में हुए दंगे के बाद शहर के तीन थाना क्षेत्रों में कर्फ्यू लगा दिया गया था। ईद भी संगीनों के साये में गुजरी थी। हालांकि दंगो के तुरंत बाद सिख और मुस्लिम समुदाय के लोगों ने सड़क पर उतर कर शांति की अपील की थी और तेजी से माहौल सामान्य हो गया था। दंगे में एक नेता मोहर्रम अली पप्पू के भाषण को भीड़ के भड़कने की वजह माना गया था। इसके बाद पप्पू को रासुका के तहत एक साल से भी ज्यादा समय तक जेल में रहना पड़ा। पप्पू इस मामले में अदालत में मुस्लिम पक्ष के पक्षकार भी हैं।

अब बदले हालात में वही मोहर्रम अली पप्पू खुद चेक वापस करने गुरुद्वारा पहुंचे और कारसेवा की इच्छा जताई। मोहर्रम अली पप्पू कहते हैं, “दंगा दुर्भाग्यपूर्ण था, हमें उसका पछतावा है। सिख बहादुर कौम है। हम उनका सम्मान करते हैं। दिल्ली में उनकी इन्साफपसंदगी ने हमारी आंखें खोल दी हैं। अब हम खुद गुरुद्वारे में कारसेवा करेंगे। मैं खुद अपने सर पर तसला रखकर जाऊंगा।”

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