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मुंबई | प्रधानमंत्री मोदी आज , मुंबई के अरब सागर में बनने वाले शिवस्मारक का शिलान्यास करेंगे. यह स्मारक गुजरात में बनने वाले सरदार पटेल के स्मारक से भी ऊँचा होगा. इसको बनाने में करीब साढ़े तीन हजार करोड़ रूपए की लागत आएगी. हालाँकि इस स्मारक के साथ कई विवाद भी जुड़े हुए है. विवादों के बावजूद महाराष्ट्र सरकार इसको बनाने की जिद पर अडी हुई है.

मुंबई के नरीमन पॉइंट से अरब सागर में 3 किलोमीटर अन्दर बनने वाले इस स्मारक के साथ विवादों का काफी पुराना नाता रहा है. छत्रपति शिवाजी के इस स्मारक को बनाने की घोषणा 2004 में कांग्रेस और एनसीपी की सरकार ने की थी. लेकिन 12 साल बीत जाने के बाद भी इस स्मारक का निर्माण कार्य शुरू नही हो सकता. इसके पीछे कई कारण रहे है.

मछुआरो का मानना है की शिवस्मारक के बनने से उनकी रोजी रोटी प्रभावित होगी. वो समुन्द्र में मछली पकड़ने नही जा सकेंगे. मछुआरो के नेता दामोदर तांडेल ने इस स्मारक का विरोध करते हुए कहा की सागर में निर्माण होने की वजह से मछुआरो समुन्द्र में मछली नही पकड़ पायेंगे. इसलिए हम स्मारक बनने के विरोध कर रहे है. उधर पर्यावरणविद प्रदीप तावड़े भी इससे सहमत दिखे.

प्रदीप के अनुसार इस स्मारक के निर्माण से समुंद्री पर्यावरण को काफी नुक्सान पहुंचेगा. गिरगाव चौपाटी खत्म होने खतरा पैदा हो जायेगा. अपना विरोध दर्ज कराने के लिए पर्यारण संरक्षक ने नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल से इस पर रोक लगाने की मांग की है. उधर कुछ नागरिक भी ऑनलाइन पिटीशन के जरिये हाई कोर्ट से इस पर रोक लगाने की मांग कर रहे है.

विरोधियो का यह भी कहना है की अगर सरकार को शिवाजी की इतनी ही फ़िक्र है तो राज्य में शिवाजी के वो किले जो अब जर्जर हो चुके है , पहले उनकी मरमत कर उनका संरक्षण करे. उधर महाराष्ट्र सरकार अपने फैसले पर अडिग है. मुख्यमंत्री देवेन्द्र फडनविस् ने कहा की छत्रपति शिवाजी के सभी किलो के संरक्षण का काम शुरू हो चुका है. स्मारक के मामले में भी चाहे कितनी मुश्किलें आये , हम इसका निर्माण कराकर छोड़ेंगे.


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