वाराणसी | आज पुरे देश में महाशिवरात्रि का पर्व पुरे धूमधाम से मनाया जा रहा है. इसके अलावा उत्तर प्रदेश में लोकतंत्र का पर्व भी मनाया जा रहा है. यहाँ विधानसभा चुनावो के चार चरणों का मतदान संपन्न हो चूका है और तीन चरण बाकी है. ऐसे में सभी राजनितिक पार्टिया सत्ता पाने के लिए एडी छोटी का जोर लगा रहे है. कोई विपक्षी नेताओं पर निजी हमले कर रहा है तो कोई समाज को धर्म के आधार पर बांटकर वोट बटोरने की कोशिश कर रहा है.

शायद इस देश में वोट पाने के लिए इससे अधिक सरल कोई उपाय नही है. यहाँ आपको कोई बाँटने वाला चाहिए और हम बंट जाते है. पता नही चलता की कब विकास का मुद्दा पीछे छूट गया और हिन्दू-मुस्लिम का मुद्दा आगे आग गया. हर चुनावो में ऐसा ही होता है. वो ऐसा इसलिए करते है क्योकि उनको मालूम है की केवल एक चिंगारी से यह समाज हिन्दू-मुस्लिम में बंट जायेगा और वोटो का धुर्विकरण होने से उनकी जीत सुनिश्चित हो जाएगी.

लेकिन अभी भी देश में कई लोग ऐसे है जो साम्प्रदायिकता की मिसाल बन एक उदहारण पेश करते रहते है. ये लोग समाज को एक सन्देश देना चाहते है की सभी लोग सबसे पहले इंसान है. ऐसी एक महिला है नूर फातिमा. वाराणसी की रहने वाली नूर यहाँ की पहाड़ी गेट कालोनी के लिए एक मिसाल है. दरअसल नूर फातिमा ने करीब 13 साल पहले इसी कालोनी में एक शिवमंदिर का निर्माण कराया था.

नूर बताती है की जब मैं इस कालोनी में रहने आई तो यहाँ एक शिवमंदिर का निर्माण चल रहा था लेकिन कई बार की कोशिशो के बाद भी उसकी नींव सीधी नही हो पा रही थी. इस दौरान कालोनी में कई अप्रिय घटनाये भी हुई और एक रोड एक्सीडेंट में उनके पति का देहांत भी हो गया. पति की मौत के बाद मेरे सपने में महादेव और मंदिर दिखाई देने लगे.

नूर ने बताया की साल 2004 में धर्मगुरूओ की राय के बाद मैंने शिवमंदिर का निर्माण कार्य शुरू कराया. निर्माण की पहली इंट मेरे हाथो से रखी गयी. फ़िलहाल मैं इस मदिर का रख रखाव करती हूँ , यही नही पांच टाइम की नमाज के अलावा मंदिर में जलाभिषेक और पूजा भी करती हूँ.


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