ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड के उपाध्यक्ष व शिया धर्म गुरु मौलाना डॉक्टर कल्बे सादिक का मंगलवार की रात 10 बजे निधन हो गया। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने मौलाना के निधन पर दुख व्यक्त किया है।

डॉक्टर कल्बे सादिक लंबे समय से बीमार चल रहे थे। सांस लेने में दिक्कत और निमोनिया के कारण उन्हें अस्पताल में भर्ती कराया गया था। लखनऊ स्थित एरा मेडिकल कॉलेज में आखिरी सांस ली। सादिक अपने पीछे पत्नी ताज सुल्ताना, तीन बेटे और एक बेटी छोड़ गए हैं।

देश-विदेश में ख्यातिप्राप्त डॉ. सादिक शिक्षा और खासकर लड़कियों व निर्धन बच्चों की शिक्षा के लिए हमेशा सक्रिय रहे। यूनिटी कालेज और एरा मेडिकल कालेज के संरक्षक भी थे। मौलाना डॉ. कल्बे सादिक की मजलिस बुधवार सुबह 10 बजे यूनिटी कॉलेज में होगी। कॉलेज के कम्पॉउंड में 11.30 बजे नमाज-ए-जनाज़ा होगी। दोपहर 2 बजे चौक स्तिथ इमामबाड़ा गुफरानमाब में तदफीन (दफ्न) होगी।

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने मौलाना कल्बे सादिक के निधन पर गहरा शोक व्यक्त किया है। उन्होंने दिवंगत आत्मा की शांति की कामना करते हुए शोक संतप्त परिजनों के प्रति संवेदना व्यक्त की। भाजपा प्रदेश अध्यक्ष स्वतंत्र देव सिंह व प्रदेश महामंत्री संगठन सुनील बंसल ने शिया धर्मगुरु मौलाना कल्बे सादिक के निधन पर गहरा शोक व्यक्त किया है।

शिक्षाविद, इस्लामिक विद्वान और सांप्रदायिक सौहार्द के राजदूत सादिक का जन्म लखनऊ के प्रसिद्ध खानदान-ए-इज्तेहाद में हुआ था। उनके पिता मौलाना कल्बे हुसैन थे और उनके भाई मौलाना कल्बे आबिद थे। दोनों का समुदाय में गहरा दबदबा था।

उनकी प्रारंभिक शिक्षा लखनऊ के सुल्तान-उल-मदारिस से हुई। उसके बाद उन्होंने अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय (एएमयू) में आगे की शिक्षा प्राप्त की। उन्होंने अरबी साहित्य में पीएचडी की। अरबी के अलावा, सादिक उर्दू, फारसी, अंग्रेजी और हिंदी भाषाओं में कुशल थे।

सादिक शायद अपने समय में भारत के पहले मौलवी थे, जिन्होंने दुनिया भर में विशेषकर अंग्रेजी भाषा में कर्बला के शहीदों की याद में उपदेश दिए थे। उन्होंने समुदाय में वैज्ञानिक सोच को भी बढ़ावा दिया और पारंपरिक चांद देखने के अलावा खगोल विज्ञान पर आधारित इस्लामिक त्योहारों के दिनों की भविष्यवाणी करने का प्रयास शुरू किया।

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