Tuesday, October 26, 2021

 

 

 

JLF 2016 : “भारत के लिए मुनासिब नहीं संसदीय व्यवस्था”- शशि थरूर

- Advertisement -
- Advertisement -

जयपुर। पूर्व केंद्रीय मंत्री शशि थरूर ने आज कहा कि भारतीय राष्ट्रीय चरित्र के हिसाब से हमारे यहां के लिए संसदीय व्यवस्था मुनासिब नहीं है लेकिन देश इसमें अटक गया है क्योंकि वह हर चीज को मूर्त रूप देने के लिए अंग्रेजों की ओर देखता रहा है।

थरूर ने कहा कि भारत जैसे विविधतापूर्ण और बड़ी आबादी वाले देश में संसदीय प्रणाली का कारगर होना कठिन है। भारत के राष्ट्रीय चरित्र के लिए मुनासिब नहीं रहने वाली संसदीय प्रणाली के साथ हमारे अटके होने की एक वजह है कि इस व्यवस्था को अंग्रेजों ने चलाया था और हमें हर चीज को मूर्त रूप देने के लिए हमेशा अंग्रेजों की ओर निहारने की आदत रही है।

जयपुर साहित्य महोत्सव के अंतिम दिन ‘ऑन अंपायर’ नाम से आयोजित सत्र में थरूर ब्रिटिश लेबर पार्टी के सांसद ट्रिस्टम हंट और पत्रकार स्वप्न दासगुप्ता से भारत में ब्रिटिश साम्राज्य के बारे में चर्चा कर रहे थे। पूर्व मंत्री ने इस बारे में एक डायरी के अंश को याद किया कि किस तरह भारतीय राष्ट्रवादी नेताओं ने उस समय डर भरी प्रतिक्रिया दी थी जब साइमन आयोग के सदस्य क्लीमेंट एटली ने कहा था कि देश के लिए राष्ट्रपति प्रणाली बेहतर होगी।

थरूर ने कहा कि भविष्य में संविधान के विचार को अधिक सैद्धांतिक तरीके से तलाशने के लिए 1930 में साइमन आयोग बनाया गया था। उस आयोग के सदस्य क्लीमेंट एटली ने अपनी डायरी में लिखा था कि उन्होंने भारतीय राष्ट्रवादी नेताओं को सुझाव दिया था कि राष्ट्रपति प्रणाली बेहतर होगी। उन्होंने कहा कि नेताओं ने डर भरी प्रतिक्रिया दी।

तिरवनंतपुरम से कांग्रेस के लोकसभा सदस्य ने कहा कि यह जरूरी नहीं है कि देश में धरोहर संस्थानों के लिए भारत अंग्रेजों का आभारी हो। हमारी सरकार की शासन व्यवस्था ऐसी है जिसे एक छोटे द्वीप में बनाया गया जिसकी आबादी आज छह करोड़ है और प्रत्येक सांसद करीब एक लाख लोगों का प्रतिनिधित्व करता है।

थरूर ने कहा, ”फिर हमने इसे अनेक जाति, वर्ण, रंग, संस्कृति, खानपान, आस्था, पहनावा और रिवाज के साथ इतने विविधता वाले देश में लागू किया और अपेक्षा रखी कि गठबंधन सरकार की चुनौतियों के बावजूद यह काम करेगा। हमने इसे इस तरह से किया कि प्रत्येक सांसद 20 लाख लोगों का प्रतिनिधित्व कर रहा है। आप जितने लोगों का प्रतिनिधित्व कर रहे हैं, उन सभी से प्रत्यक्ष रूप से मिलना असंभव है।

यह सत्र एक तरह से थरूर के वायरल हो चुके ऑक्सफोर्ड यूनियन बहस के भाषण का अगला हिस्सा है जिसमें पूर्व मंत्री ने यह भी कहा कि ब्रिटेन द्वारा भारत को पहुंचाये गये ऐतिहासिक नुकसान की भरपाई का आर्थिक मूल्य लगाना असंभव है क्योंकि 200 से अधिक सालों तक हुआ नुकसान बहुत ज्यादा है।

हंट ने कहा कि ब्रिटेन के साम्राज्यवादी इतिहास के समस्त पहलू को पहले ब्रिटिश स्कूलों में नहीं पढ़ाया जाता था, लेकिन अब उसे पाठ्यक्रम में शामिल किया जा रहा है। साभार: samacharjagat

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

Hot Topics

Related Articles