Saturday, September 18, 2021

 

 

 

शरई कानून में लोकसभा और अदालतों को परिवर्तन का अधिकार नहीं: दारुल उलूम देवबंद

- Advertisement -
- Advertisement -

devband

केंद्र सरकार द्वारा तीन तलाक का विरोध करने और समान आचार संहिता लागू करने को लेकर दारुल उलूम देवबंद ने मोदी सरकार का विराेध करते हुए कहा कि शरीयत आैर तीन तलाक पर किसी भी सूरत में मोदी सरकार की दखलअंदाजी काे बर्दाश्त नहीं किया जाएगा आैर इस दखल के विराेध में देशभर में हस्ताक्षर अभियान भी चलाया जाएगा.

बुधवार को मजलिस-ए-सूरा की बैठक में कहा गया कि केंद्र सरकार शरीयत के मामलाें में बेवजह दखल कर रही है. धारा 25 के तहत मुस्लिम पर्सनल लॉ मुस्लिमाें का बुनियादी अधिकार है. एेसे में किसी भी दखल काे बर्दाश्त नहीं किया जाएगा. ठक में तीन तलाक, बहु विवाह, लॉ कमीशन आैर कॉमन सिविल काेड के मसलाें पर विधि आयाेग के सवालनामें का विराेध करने का भी फैसला लिया गया.

इस मौके पर मुस्लिम पर्सनल लॉ बाेर्ड के वरिष्ठ उपाध्यक्ष माैलाना माेहम्मद सालिम कासमी ने कहा कि  शरीयत एप्लीकेशन 1938 में साफ-साफ दिया गया है कि निकाह, तलाक, मीरास व वसीयत जैसे समाजी मामलाें में मुसलमानाें पर काेई आैर नहीं बल्कि उन्के शरई कानून ही लागू हाेंगे. एेसे में लाेकसभा आैर अदालतें इसमें काेई परिवर्तन नहीं कर सकती. अब जब सराकार ने यह कदम उठाया है ताे इसका खुलकर विराेध किया जाएगा.

वहीँ माैलाना मुफ्ती अबुल कासमी नाेमानी ने कहा कि सिविल यूनिफॉर्म के बहाने माेदी सरकार सिर्फ मुस्लिमाें ही नहीं, बल्कि देशभर में रहने वाले अन्य अल्पसंख्यकाें की धार्मिक रीती-रिवाजों में बदलाव करना चाहती है. आजज माेदी सरकार ने मुस्लिम पर्सनल लॉ बाेर्ड काे निशाना बनाया है ताे कल यह सरकार जैन, सिख आैर ईसाई समाज के धर्मिक मसलाें में भी हस्तक्षेप करेगी.

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

Hot Topics

Related Articles