नागरिकता संशोधन कानून (सीएए) के खिलाफ शाहीन बाग में जारी प्रदर्शन पर सुप्रीम कोर्ट के द्वारा नियुक्त वार्ताकारों ने आज प्रदर्शनकारियों से मुलाक़ात की। ये मुलाक़ात वार्ताकारों में से एक वरिष्ठ वकील संजय हेगड़े के घर पर हुई। वार्ताकारों में हेगड़े के अलावा साधना रामचंद्रन और वजाहत हबीबुल्लाह भी हैं।

सीएए के खिलाफ शाहीन बाग में रास्ता घेरकर दो महीने से ज्यादा समय से धरना दे रही महिलाओं का कहना है कि अगली तारीख पर सुप्रीम कोर्ट ने रास्ता खाली करने का निर्णय दिया तो सभी प्रदर्शनकारी उसे स्वीकार करेंगे। प्रदर्शनकारी महिलाओं ने कहा कि वे मध्यस्थों से बातचीत करेंगी, लेकिन पुलिस के किसी भी अधिकारी से नहीं। उन्होंने कहा कि इस प्रकरण में पुलिस की भूमिका शुरू से ही संदिग्ध नजर आ रही है।

दादी बिल्किस बानो ने कहा, “हम बात करने को तैयार हैं जो भी आए और सुप्रीम कोर्ट का जो भी फैसला होगा उसको मानेंगे, लेकिन हमारी भी तो सुनो। हम सीएए को लेकर प्रदर्शन पर हैं, सरकार इस कानून को वापस ले ले हम एक घंटे में उठ जाएंगे।”

उन्होंने पुलिस प्रशासन पर अपने गुस्से का इजहार करते हुए कहा, “हमारे 50 बच्चों को मा’रा दिनदहाड़े। हमें पुलिस मार रही है। तुम यहां बुरके में लड़की भेजते हो जासूसी करने, हम तो कुछ कर भी नही रहे हैं। ..रोजगार है नहीं, लोग भूखे मर रहे हैं। हम यहां से हटेंगे नहीं, गो’ली मारो’गे तो पहले मैं खाऊंगी।”

बता दें कि सोमवार को सुप्रीम कोर्ट ने वरिष्ठ वकील संजय हेगड़े और साधना रामचंद्रन को प्रदर्शकारियों से बात कर उन्हे प्रदर्शनस्थल बदलने के लिए मनाने को कहा है। इसके लिए उन्हें एक हफ्ते का समय दिया गया है। इसके साथ ही वजहत हबीबुल्लाह, चंद्रशेखर आजाद इस दौरान वार्ताकारों की मदद करेंगे।

जस्टिस केएम जोसेफ और जस्टिस एसके कौल की बेंच ने कहा कि प्रदर्शन करना लोगों का अधिकार है, लेकिन इससे सड़क बंद नहीं होनी चाहिए। इसके बाद अदालत ने प्रदर्शनकारियों से बातचीत के लिए वरिष्ठ वकील संजय हेगड़े को मध्यस्थ नियुक्त कर दिया। एडवोकेट साधना रामकृष्णन इसमें उनकी मदद करेंगी।

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