नई दिल्ली | देश में जीएसटी लागु हुए एक महीने से ज्यादा समय हो चूका है. लेकिन अभी भी देश के कारोबारी इस नयी कर व्यवस्था को समझने में नाकाम रहे है. हालाँकि सरकार बार बार दावा कर रही है की इस कर व्यवस्था से देश की अर्थव्यस्था को एक नई ऊर्जा मिलेगी जिससे विकास कार्यो में तेजी आएगी. लेकिन जीएसटी लागु होने के एक महीने बाद जो रिपोर्ट सामने आई है वो बेहद ही हतोत्साहित करने वाली है.

जीएसटी लागु होने के एक महीने बाद सेवा क्षेत्र की गतिविधियों का आकलन करने वाली संस्था के अनुसार जुलाई माह में सेवा क्षेत्र में भारी कमी दर्ज की गयी है. यह चार साल के निम्न स्तर पर पहुँच चुकी है. रिपोर्ट का यहाँ तक कहना है की जुलाई के आंकड़े पुरे भारत में गतिविधियों में गिरावट को दर्शा रहे है जो भारत की अर्थव्यवस्था के लिए शुभ समाचार नही है. हालाँकि सेवा क्षेत्र की कंपनियों का कहना है की नए काम के आर्डर कम आने की वजह से यह कमी दर्ज की गयी है.

दरअसल हर माह सेवा क्षेत्र की गतिविधियों का आंकलन करने वाला दि निक्केई इंडिया सविर्सिज पर्चेजिंग मैनेजर्स इंडेक्स (पीएमआई) , जुलाई माह में 45.9 दर्ज किया गया. जो सितम्बर 2013 के बाद सबसे कम है. यहाँ तक की जून माह में यह इंडेक्स 53.1 पर था. जो आठ माह के उच्चतम स्तर पर था. आईएचएस मार्किट की प्रधान अर्थशास्त्री पॉलीयाना डी लीमा ने रिपोर्ट में कहा जुलाई के पीएमआई आंकड़े पूरे भारत में गतिविधियों में गिरावट को दर्शाते हैं, जून में गतिविधियों में तेजी आने के बाद जुलाई में अर्थव्यवस्था वापसी के रुख में आ गई.

लिमा के अनुसार 2009 के बाद निजी क्षेत्र की गतिविधियों में सबसे बड़ी गिरावट है जबकि नोट बंदी के बाद पहली. हालाँकि सेवा क्षेत्र की कंपनियों का कहना है की जीएसटी लागू होने के बाद हमें कम आर्डर मिले जिसकी वजह से यह गिरावट दर्ज की गयी. लेकिन जैसे जैसे लोग जीएसटी को समझने लगेंगे तो यह क्षेत्र वापिस गति पकड लेगा. निक्केई इंडिया मैनुफैक्चरिंग पीएमआई रिपोर्ट के अनुसार विनिर्माण क्षेत्र में सबसे ज्यादा गिरावट देखी गयी है.

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