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फर्जी मुठभेड़ में मारे गए सोहराबुद्दीन शेख के मामले में अब उनके भाई रुबाबुद्दीन शेख़ के वकील गौतम तिवारी ने गुरुवार को बॉम्बे हाईकोर्ट को बताया कि सोहराबुद्दीन, उसकी पत्नी कौसर बी और सहयोगी तुलसीराम प्रजापति की हत्या की साजिश गुजरात एवं राजस्थान पुलिस के वरिष्ठ अधिकारियों ने मिलकर रची थी.

तिवारी के अनुसार, इस साजिश में गुजरात एटीएस के वरिष्ठ अधिकारी डी जी वंजारा एवं राजकुमार पांडियन और राजस्थान के आईपीएस अधिकारी दिनेश एम एन शामिल थे. जिन्हें आरोप मुक्त कर दिया गया है. उन्होंने कहा कि उदयपुर के तत्कालीन पुलिस अधीक्षक दिनेश एमएन अन्य पुलिस अधिकारियों से मिलने के लिए नवंबर 2005 में  अहमदाबाद गए थे.

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तिवारी ने कहा कि दिनेश एम एन का दावा है कि वह आधिकारिक प्रशिक्षण के लिए अहमदाबाद गए थे जबकि राजस्थान पुलिस के महानिरीक्षक सहित उनके अन्य वरिष्ठ अधिकारियों को उस वक्त किसी ऐसे प्रशिक्षण के बारे में पता ही नहीं है.

वकील ने कहा, ‘‘इसके अलावा, दिनेश एम एन का दावा है कि उन्हें सोहराबुद्दीन के बारे में सूचना मिली थी. उनका कहना है कि वह उसे गिरफ्तार करने गए थे क्योंकि उदयपुर में दर्ज एक मामले में उसकी तलाश थी. फिर दिनेश एम एन अपने साथ संबंधित पुलिस अधिकारियों को लेकर क्यों नहीं गए? इसकी बजाय उन्होंने अपने तीन कनिष्ठ कर्मियों को साथ लिया जो हमेशा उनके इर्द-गिर्द रहने वाले लोग थे.’

उन्होंने कहा, ‘‘गवाहों के बयानों की शक्ल में यह साबित करने के साक्ष्य हैं कि दिनेश ने वंजारा और पांडियन के साथ मिलकर मुठभेड़ों की साजिश रचने और उन्हें अंजाम देने में अभिन्न भूमिका निभाई.’  तिवारी ने बताया कि इस वरिष्ठ पुलिस अधिकारी को आरोप-मुक्त कर दिया गया, जबकि एनकाउंटर करने वाली पुलिस टीम में शामिल आरोपी जूनियर अधिकारियों को आरोप-मुक्त नहीं किया गया है.

ध्यान रहे बॉम्बे हाई कोर्ट गुजरात के पूर्व डीजीपी डीजी वंज़ारा, राजस्थान के पुलिस अधिकारी दिनेश एमएन और गुजरात पुलिस के एक अधिकारी राजकुमार पांडियन को आरोप मुक्त किए जाने को लेकर रुबाबुद्दीन शेख़ की ओर से दाख़िल तीन याचिकाओं की सुनवाई कर रहा है.

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