Friday, September 17, 2021

 

 

 

वरिष्ठ पत्रकार का दावा- आरएसएस नहीं चाहता कि अयोध्या में राम मंदिर बने…..

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आरएसएस नेता कृष्णगोपाल ने बताया कि आरएसएस नहीं चाहता कि अयोध्या में राम मंदिर बने बल्कि इस मुद्दे को वह हिंदू स्वाभिमान और बीजेपी को फायदा पहुंचाने के लिए भुना रहा है।

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एक वरिष्ठ पत्रकार ने रिटायर्ड आईएएस अफसर के हवाले से दावा किया है कि आरएसएस अयोध्या में राम मंदिर नहीं बनवाना चाहता। पत्रकार का नाम शीतल पी. सिंह है जो कि सत्य हिंदी डॉट कॉम के लिए काम करते हैं। वहीं रिटायर्ड आईएएस अधिकारी का नाम एस. पी. सिंह है। वह 1982 बैच के अधिकारी रहे हैं। आरएसएस नेता कृष्णगोपाल ने कहा है कि आरएसएस नहीं चाहता कि अयोध्या में राम मंदिर बने बल्कि इस मुद्दे को वह हिंदू स्वाभिमान और बीजेपी को फायदा पहुंचाने के लिए भुना रहा है।

कृष्णगोपाल ने यह बात बीते दिनों बीजेपी में शामिल रिटायर्ड आईएएस एस. पी. सिंह से कही थी। एस. पी. सिंह राम मंदिर मामले में मध्यस्थता पैनल के मध्यस्थ श्री श्री रविशंकर के साथ जुड़े रहे हैं। इसके साथ ही वह आरएसएस और उससे जुड़े संगठनों से भी जुड़े रहे हैं। उन्होंने अयोध्या बाबरी जमीन विवाद को सुलझाने के लिए बनाए गए मध्यनस्थता पैनल में शामिल तीनों पक्षकारों के बीच हुई बातचीत को भी साझा किया।

पी. सिंह ने बताया कि मध्यस्थता पैनल में तीनों पक्षकारों के बीच बात लगभग पूरी हो चुकी थी और राम मंदिर मामले के तीनों पक्षकार एक प्रेस कॉन्फ्रेंस कर एक सुर में इसकी घोषणा करने वाले थे कि उन्हें समझौता मंजूर है। लेकिन एक पक्षकार ने अचानक अपना रुख बदल लिया। उन्होंने बताया कि ये और कोई नहीं बल्कि कृष्णगोपाल थे।

रिटायर्ड अफसर ने बताया ‘उन्होंने पीछे हटने के लिए कहा और कहा कि हमें मंदिर नहीं चाहिए, क्योंकि राम और मंदिर तो कण-कण में हैं। हमें और कुछ नहीं बल्कि हिंदू स्वाभिमान चाहिए। अगर हम सौदा करे लेंगे तो हिंदुओं का सामना कैसे करेंगे क्योंकि जिस तरह मुगल शासक बाबर ने हमसे मंदिर छीना था हमें भी वैसे ही छीनना है। एस पी सिंह ने आगे कहा ‘सच तो यह है कि ये समझौता नहीं करना चाहते और न ही मंदिर बनवाना चाहते हैं। आरएसएस मंदिर नहीं बनने देना चाहता और यही एक सच्चाई है।

बता दें कि सुप्रीम कोर्ट में राम मंदिर मामले पर सुनवाई पूरी हो चुकी है। मामले से जुड़ें तीनों पक्षकार दलीलें जजों के सामने रख चुके हैं। नवंबर में चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया रंजन गोगोई के रिटायरमेंट से पहले इस पर फैसला सुनाया जा सकता है।

कौन हैं एस पी सिंह: एसपी सिंह उत्तर प्रदेश में प्रमुख सचिव स्तर के अफसर रह चुके हैं। इसके साथ रिटायरमेंट से तीन साल पहले वीआरएस लेकर उन्होंने अखिलेश यादव सरकार के भ्रष्टाचार की पोल खोली थी। बीजेपी के दिवंगत नेता अरुण जेटली के कहने पर ही वह 2017 में यूपी विधानसभा चुनाव के दौरान बीजेपी में शामिल हो गए थे। सिंह फैजाबाद के कमिश्नर रहे हैं। राम जन्म जमीन विवाद और राम जन्म भूमि आंदोलन से जुड़े रहे हैं।

साभार: जनसत्ता

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