राफेल डील पर मोदी सरकार को झटका – SC करेगा गोपनीय दस्तावेजों पर फिर से सुनवाई

supreme court

राफेल डील पर मोदी सरकार फिर से मुसीबतों में घिर सकती है। शीर्ष अदालत ने मोदी सरकार को दी गई क्‍लीन चिट की पुनर्विचार याचिकाओं पर केंद्र की आपत्तियों को खारिज कर दिया है।

शीर्ष अदालत ने बुधवार को अपने फैसले में कहा- राफेल डील मामले में याचिकाकर्ता द्वारा गोपनीय दस्तावेजों की गलत ढंग से हासिल की गई फोटोकापी के आधार पर सुप्रीमकोर्ट में दाखिल पुनर्विचार याचिका पर सुनवाई होगी। केंद्र ने कहा था कि विशेषाधिकार वाले जिन गोपनीय दस्तावेजों को पुनर्विचार याचिका का आधार बनाया गया, उन्हें इंडियन एविडेंस एक्ट की धारा 123 के तहत सबूत नहीं माना जा सकता।

हालांकि सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई के दौरान जस्टिस के. एम. जोसेफ ने कहा था कि आरटीआई ऐक्ट 2005 में आया है और ये एक क्रांतिकारी कदम था ऐसे में हम पीछे नहीं जा सकते।  सुप्रीम कोर्ट ने इस आपत्ति पर अपना फैसला 14 मार्च की सुनवाई के बाद सुरक्षित रख लिया था।

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चीफ जस्टिस रंजन गोगोई की बेंच ने कहा था- जब हम केंद्र की आरंभिक आपत्ति पर फैसला कर लेंगे, तभी हम पुनर्विचार याचिकाओं के दूसरे पहलुओं पर विचार करेंगे। स्पष्ट कर दें कि हम केवल तभी दूसरी जानकारियों पर जाएंगे, जब हम केंद्र की आपत्ति को खारिज कर दें। अटॉर्नी जनरल केके वेणुगोपाल ने दलील दी थी कि कोई भी इन दस्तावेजों को बिना संबंधित विभाग की इजाजत के अदालत में पेश नहीं कर सकता। यह दस्तावेज ऑफिशियल सीक्रेट एक्ट के तहत सुरक्षित रखे गए हैं और सेक्शन 8(1)(ए) के तहत सूचना के अधिकार के दायरे से भी बाहर हैं।

इस दौरान याचिकाकर्ता वकील प्रशांत भूषण ने कहा था कि ये तमाम दस्तावेज पब्लिक डोमेन में है। जो दस्तावेज पहले से लोगों के सामने है उस पर कोर्ट विचार न करें क्योंकि ये प्रिविलेज्ड दस्तावेज है, यह बेकार की दलील है। एविडेंस ऐक्ट के तहत जो दस्तावेज पब्लिक डोमेन में लाने से रोका गया है, वे वैसे दस्तावेज हैं जो पहले से गोपनीय हैं और प्रकाशित नहीं हुए हैं लेकिन इस मामले में डिफेंस के दस्तोवज पहले से लोगों के सामने है। केंद्र सरकार ने अभी तक मामले में केस दर्ज नहीं किया। पहली बार 18 नवंबर को ये रिपोर्ट वेबसाइट पर छपी।

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