Tuesday, October 26, 2021

 

 

 

अल्पसंख्यक संस्थानों को लेकर SC का बड़ा फैसला – मदरसा सेवा कानून 2008 को सही ठहराया

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उच्चतम न्यायालय ने सोमवार को पश्चिम बंगाल सरकार को राहत देते हुए मदरसा सेवा आयोग कानून, 2008 की संवैधानिक वैधता को बरकरार रखा है। इसके साथ ही राज्य के मदरसों में शिक्षकों की नियुक्ति का रास्ता साफ कर दिया है।

बता दें कि कोलकाता हाईकोर्ट ने मदरसा सेवा कानून 2008 को संविधान के अनुच्छेद 30 का उल्लंघन बताते हुए रद कर दिया था। आयोग के जरिए नियुक्त हुए शिक्षकों और राज्य सरकार ने फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी थी। अब सुप्रीम कोर्ट ने इस कानून को वैध ठहराया है।

शीर्ष अदालत ने पश्चिम बंगाल मदरसा सेवा आयोग अधिनियम, 2008 की संवैधानिक वैधता को बरकरार रखते हुए कहा कि जो सरकारें या संगठन अल्पसंख्यक संस्थानों की सहायता करते हैं, उनके पास अब यह अधिकार होगा कि वे न केवल भावी शिक्षकों की सिफारिश कर सकेंगे बल्कि उन्हें सीधे नियुक्त भी कर पाएंगे।

न्यायमूर्ति अरूण मिश्रा और न्यायमूर्ति यूयू ललित की पीठ ने कलकत्ता उच्च न्यायालय के उस आदेश को रद कर दिया, जिसमें इस कानून को असंवैधानिक करार दिया गया था। पीठ ने कहा कि मदरसा प्रबंध समिति की ओर से अब तक की गई नियुक्तियां व्यापक हितों को देखते हुए वैध रहेंगी। शीर्ष अदालत ने पश्चिम बंगाल मदरसा सेवा आयोग कानून, 2008 की संवैधानिक वैधता भी बरकरार रखी है।

गौरतलब है कि इससे पहले साल 2014 में बोर्ड ने शिक्षकों की नियुक्ति के लिए परिणामों की घोषणा की थी, जिसमें 2,600 से अधिक शिक्षकों की नियुक्ति की जानी थी, लेकिन हाईकोर्ट के आदेश के बाद इस पर रोक लगा दी गई थी। ऐसा अनुमान लगाया जा रहा है कि अब परीक्षा में उत्तीर्ण शिक्षकों की भर्ती जल्द से जल्द की जाएगी।

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