Thursday, August 5, 2021

 

 

 

दिल्ली हिंसा पर SC ने कहा – हम भी शांति चाहते हैं, लेकिन ऐसी घटनाओं को रोकने का पावर नहीं

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सुप्रीम कोर्ट भड़काऊ भाषण देने के आरोपी भाजपा नेताओं कपिल मिश्रा, अनुराग ठाकुर और परवेश वर्मा के खिलाफ मामलों की सुनवाई के लिए तैयार हो गया है। हिंसा के पीड़ितों की तरफ से दायर इस याचिका में इन नेताओं पर एफआईआर दर्ज करने के लिए निर्देश देने की मांग की गई है।

याचिका पर सुनवाई के दौरान मुख्य न्यायाधीश एसए बोबडे ने कहा कि अदालत भी शांति चाहती है, लेकिन उसकी कुछ सीमाएं हैं। चीफ जस्टिस बोबडे ने याचिकाकर्ताओं की ओर से पेश वरिष्ठ वकील कॉलिन गोंसाल्विस से कहा, ‘आपको यह बात समझने की जरूरत है कि इस तरह की घटनाओं को रोकने के लिए हम समर्थ नहीं हैं। जब इस तरह की घटनाएं हो जाती है तब हम परिदृश्य में आते हैं।’

गोंसाल्विस ने जब यह कहा कि दिल्ली में दंगों के कारण रोजाना लोगों की मौत हो रही है। इस पर चीफ जस्टिस ने कहा कि वह इस मौत पर किसी तरह की टिप्पणी नहीं करना चाहते। चीफ जस्टिस ने यह भी कहा, अदालत इस तरह की घटनाओं को नहीं रोक सकती। सभी लोगों को यह समझना चाहिए। हम तभी कार्रवाई या आदेश पारित करते हैं जब इस तरह की घटनाएं हो जाती हैं।’

पीठ ने यह भी कहा, ‘अदालत चाहती है कि शांति बनी रहे। हमारी अपनी भी सीमाएं हैं और हम इससे भलीभांति अवगत हैं। ऐसा समझा जाता है मानो कुछ मायने में हम जिम्मेदार हैं। कुछ मीडिया रिपोर्ट में ऐसा कहा जा रहा है लेकिन हमें अपनी सीमाएं मालूम हैं।’ जवाब में गोंसाल्विस ने कहा हम अदालत को किसी चीज के लिए जिम्मेदार नहीं ठहरा रहे हैं।

हालांकि बाद में चीफ जस्टिस बोबडे ने पीड़ितों की याचिका पर बुधवार को सुनवाई करने का निर्णय लिया। पीठ ने कहा, ‘हमें पता नहीं है हम इस पर क्या कर सकते हैं जबकि दिल्ली हाईकोर्ट में पहले ही इस तरह का मामला लंबित है।’ गोंसाल्विस ने कहा कि दिल्ली हाईकोर्ट ने 13 अप्रैल तक के लिए सुनवाई टाल दी है जिससे उन्हें हाईकोर्ट से कोई मदद नहीं मिल रही है जबकि अब भी हालात गंभीर है। लिहाजा अदालत के आदेश की दरकार है।

सुप्रीम कोर्ट में दायर याचिका में यह भी अनुरोध किया गया है कि दंगों की जांच के लिए दिल्ली से बाहर के अधिकारियों का विशेष जांच दल यानी एसआईटी बनाया जाए। साथ ही इसमें कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए सेना की तैनाती की मांग के अलावा पुलिसकर्मियों की भूमिका की जांच के लिए किसी रिटायर्ड जज के नेतृत्व वाली जांच समिति बनाने की मांग की भी गई है।

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